कुछ शिक्षक स्कूल पहुंचे, तो कुछ ने जताया विरोध

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25,753 शिक्षक व गैर शिक्षा कर्मी नौकरी से वंचित हो गये हैं. हालांकि उन्हें आधिकारिक बर्खास्तगी पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बर्खास्त शिक्षकों को दी थी स्कूल जाने की सलाह

संवाददाता, कोलकातासुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25,753 शिक्षक व गैर शिक्षा कर्मी नौकरी से वंचित हो गये हैं. हालांकि उन्हें आधिकारिक बर्खास्तगी पत्र अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सोमवार को नेताजी इंडोर स्टेडियम में एक बैठक में इन शिक्षकों को स्कूल जाने की सलाह दी थी. इनमें से कुछ लोग मंगलवार को स्कूल गये. कोई एक घंटे के लिए, तो कोई दो घंटे के लिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित शिक्षकों के एक बड़े हिस्से ने मुख्यमंत्री की सलाह पर ध्यान नहीं दिया और इस घोषणा का विरोध भी किया. बताया जाता है कि दो बेरोजगार शिक्षक उत्तर 24 परगना के बशीरहाट स्थित निमिकी हाई स्कूल में पढ़ाने गये, लेकिन थोड़े समय के लिए. उन्होंने कक्षाएं नहीं लीं, वह 30-40 मिनट तक स्कूल में रहे. उन्होंने प्रधानाध्यापक से बात की और फिर वापस चले गये. जिले के कई अन्य स्कूलों में कोई भी नौकरी गंवाने वाला शिक्षक काम पर नहीं आया. कुछ लोगों ने प्रिंसिपल से संपर्क किया है कि वह क्या करें. पूर्वी मिदनापुर के कुछ क्षेत्रीय स्कूलों से संपर्क करने पर पता चला कि उन स्कूलों में नौकरी गंवाने वाले कोई भी शिक्षक और शिक्षाकर्मी स्कूल नहीं पहुंचा.

नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

खड़गपुर. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया. इन्होंने कोतवाली थाना अंतर्गत मेदिनीपुर शहर के कलेक्टर मोड़ इलाके में स्थित जिला शासक कार्यालय के सामने मानव श्रृंखला बना विरोध जताया. साथ ही जिला शिक्षा भवन परिसर स्थित डीआइ कार्यालय के गेट में ताला जड़ दिया. वे नौकरी बहाल करने की मांग कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना है था कि उनकी नियुक्ति वैध तरीके से हुई थी. बिना सोचे-समझे और सटीक जांच किये बिना उनसे उनकी नौकरी छीन ली गयी. सरकार को हमारा हक किसी भी कीमत पर लौटाना होगा. जब तक हमें हमारी नौकरी वापस नहीं मिलती, आंदोलन चलेगा.

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