मुख्य बातें
SIR in Bengal : कोलकाता : पश्चिम बंगाल में SIR का काम चल रहा है. चुनाव आयोग को मिले आंकड़ों के अनुसार बंगाल के तीन जिलों में सबसे अधिक संदिग्ध वोटर मिले हैं. इन वोटरों की संख्या कुल संख्या का 36 प्रतिशत है. बंगाल में 9 लाख से अधिक ऐसे वोटर मिले हैं, जिनके छह या उससे अधिक बच्चे हैं. हजारों ऐसे वोटर मिले हैं जिनमें देखा गया है कि माता-पिता की उम्र का अंतर बच्चों की उम्र के अंतर से कम है. यह समस्या दक्षिण बंगाल में अधिक देखने को मिली. आयोग को मिले आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण 24 परगना मुर्शिदाबाद या नादिया जैसे सीमावर्ती जिलों से आगे है. मुर्शिदाबाद में छह या उससे अधिक बच्चों वाले लोगों की संख्या नौ लाख से अधिक है.
सबसे अधिक गड़बड़ी मुर्शिदाबाद में
चुनाव आयोग के इस आंकड़े पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित डेटा है. वे इस पर कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते. पता चला है कि पूरे बंगाल में तीन जिलों में तार्किक विसंगति की दर 36 प्रतिशत है. मुर्शिदाबाद इस सूची में सबसे ऊपर है. इस विसंगति में 1,672,123 लोगों के नाम शामिल हैं. अगला नंबर दक्षिण 24 परगना का है. यहां तार्किक विसंगति वाले 1 लाख 487 हजार 48 नाम हैं. वहीं उत्तर 24 परगना में तार्किक विसंगति वाले 1 लाख 100 हजार 783 नाम हैं. आयोग के सूत्रों के अनुसार, हावड़ा जिले में पिता के नाम में विसंगतियों की संख्या 3,52,0717 है. बच्चों की कुल संख्या 2,57,024 है.
कोलकाता में कम मामले
स्वाभाविक रूप से, उत्तर और दक्षिण कोलकाता में संदिग्ध वोटरों की कुल संख्या अन्य प्रमुख जिलों की तुलना में काफी कम है. एसआईआर (SIR) के मुद्दे को लेकर बंगाल में पहले ही एक मामला दर्ज किया जा चुका है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का ध्यान आकर्षित किया गया है. पदनाम में विसंगति तार्किक विसंगतियों की सूची में सामने आ रही है. इस मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाया गया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत प्रतिदिन दायर किए जा रहे नए आवेदनों से नाराज हैं. मुख्य न्यायाधीश की महत्वपूर्ण टिप्पणी यह है, प्रतिदिन नए आवेदन दायर किए जा रहे हैं, वास्तव में, यह पूरी प्रक्रिया को रोकने का एक प्रयास है.
Also Read: अभिषेक बनर्जी का भाजपा व चुनाव आयोग पर निशाना, बोले- अब SIR का खेल खत्म
