SIR Impact on Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब हार-जीत के कारणों का पोस्टमार्टम शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के पीछे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है.
मतदाता सूची की सफाई ने दी सत्ताविरोधी लहर को धार
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से सबसे अधिक नाम हटाये गये, वहां टीएमसी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. विशेष रूप से उन सीटों पर जहां हटाये गये नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से अधिक थी, वहां भाजपा ने प्रचंड बढ़त हासिल की. इस चुनावी प्रक्रिया ने साबित कर दिया कि मतदाता सूची की ‘सफाई’ सत्ताविरोधी लहर को और ज्यादा धार दे दी थी.
हटाये गये वोट और टीएमसी की हार के आंकड़े
मतदाता सूची से फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाना तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए ‘सुनामी’ साबित हुआ.
- बंगाल की 177 सीटों पर मतदाता सूची से हटाये गये नामों की संख्या टीएमसी की 2021 की जीत के अंतर से कहीं ज्यादा थी.
- 177 संवेदनशील सीटों में से भाजपा ने 140 से अधिक सीटों पर कब्जा कर लिया. यह बताता है कि टीएमसी के ‘गुप्त वोट बैंक’ ने इस बार काम नहीं आया.
- उन 50 सीटों पर जहां 15,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये गये थे, वहां टीएमसी के दिग्गज मंत्रियों को भी हार का मुंह देखना पड़ा.
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फर्जी मतदाताओं पर स्ट्राइक, कैसे हुआ क्लीन स्वीप?
निर्वाचन आयोग द्वारा लागू की गयी SIR प्रक्रिया ने टीएमसी के पारंपरिक चुनाव प्रबंधन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया.
- मृत और फर्जी वोटर्स की छुट्टी : वर्षों से मतदाता सूची में मौजूद मृत और पलायन कर चुके मतदाताओं के नाम इस बार हटा दिये गये. टीएमसी इन्हीं वोटों के दम पर अपनी जीत सुनिश्चित करती थी.
- सटीक मिलान : आधार लिंक और डिजिटल वेरिफिकेशन के कारण इस बार फर्जी मतदान की गुंजाइश न के बराबर रही.
- विपक्ष का फायदा : भाजपा ने उन क्षेत्रों में अधिक ध्यान केंद्रित किया, जहां मतदाता सूची में बड़े बदलाव हुए थे. इसका नतीजा यह हुआ कि टीएमसी के अभेद्य माने जाने वाले किले भी ढह गये.
SIR Impact on Bengal Election 2026: क्या टीएमसी ने हार पहले ही भांप ली थी?
चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी और उनके सिपहसालारों ने SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार सवाल उठाये थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि ‘जान-बूझकर’ उनके समर्थकों के नाम हटाये जा रहे हैं. अब चुनावी नतीजे यह तस्दीक कर रहे हैं कि टीएमसी का यह डर बेवजह नहीं था. वोट बैंक में आयी इस ‘तकनीकी कमी’ ने टीएमसी के जमीनी समीकरणों को बिगाड़ दिया, जिससे भाजपा को 207 सीटों तक पहुंचने का आसान रास्ता मिल गया.
