Sharp Fall in Raw Jute Prices: पश्चिम बंगाल में कच्चे जूट के बाजार में अचानक आयी भारी गिरावट से जूट उद्योग और किसानों के बीच हड़कंप मच गया है. जुलाई महीने की शुरुआत से लेकर 1 अगस्त के बीच कच्चे जूट की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गयी है.
3 हफ्ते में 9000 प्रति क्विंटल से अधिक गिरी दरें
जूट बेलर्स एसोसिएशन (JBA) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण बंगाल में TD-5 श्रेणी के कच्चे जूट की मानक दर 9 जुलाई को 18,300 रुपए प्रति क्विंटल थी. मात्र तीन हफ्तों के भीतर यह 9,000 रुपए से अधिक गिरकर 1 अगस्त को 9,100 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गयी.
उद्योग जगत ने जतायी चिंता
जूट उद्योग के प्रमुख विशेषज्ञ और इंडियन जूट मिल एसोसिएशन (IJMA) के पूर्व चेयरमैन संजय काजरिया ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा- कच्चे जूट की कीमतों में इतनी असाधारण गिरावट बेहद चिंताजनक है. यह स्थिति किसानों, जूट मिलों और केंद्र सरकार की पैकेजिंग प्रणाली के लिए गंभीर संकट खड़ा करती है.
ये भी पढ़ें: 2026-27 के लिए कच्चे जूट का एमएसपी 275 रुपये बढ़ा
नयी फसल से पहले दाम गिरना समझ से परे : काजरिया
संजय काजरिया ने आगे कहा कि बाजार में नयी फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने से पहले ही दाम इस तरह गिरना समझ से परे है. इस बात की गहराई से जांच होनी चाहिए कि सौदों के आधार पर कीमतें अचानक इतनी नीचे कैसे चली गयीं.
ये भी पढ़ें: कच्चे जूट की जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के दिये संकेत
JBA के मूल्य निर्धारण पर IJMA की आपत्ति
इस उथल-पुथल के बीच जूट मिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन इंडियन जूट मिल एसोसिएशन (IJMA) ने जूट बेलर्स एसोसिएशन (JBA) के रेट निर्धारण के तरीके पर सवाल खड़े कर दिये हैं. IJMA ने 14 जुलाई को JBA के चेयरमैन मदन गोपाल माहेश्वरी को एक पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि JBA द्वारा रोजाना प्रकाशित की जाने वाली दरें बाजार के वास्तविक सौदों (Real Market Transactions) से मेल नहीं खातीं.
ये भी पढ़ें: जूट की खुदरा कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल पहुंची
IJMA ने कहा- कम दिखायी जा रही हैं दरें
IJMA का कहना है कि JBA द्वारा प्रकाशित दरें कम दिखायी जा रही हैं, जबकि जूट मिलों को वास्तव में रेडी डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. इसके बावजूद, मिलों को कच्चे जूट की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इस विसंगति से सरकारी जूट पैकेजिंग सामग्री के मूल्य निर्धारण तंत्र को लेकर चिंताएं बढ़ गयी हैं.
