बंगाल चुनाव 2026 में आलू किसानों की आत्महत्या को बनाया मुद्दा, शमिक भट्टाचार्य का ममता बनर्जी सरकार पर हमला

Samik Bhattacharya Press Conference: पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सॉल्ट लेक में प्रेस वार्ता कर ममता बनर्जी सरकार को कृषि संकट और मतदाता सूची में गड़बड़ी पर घेरा. चुनाव आयोग से की बड़ी मांग. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Samik Bhattacharya Press Conference: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की सियासत में उबाल आ गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आलू किसानों की आत्महत्या और राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाया है. गुरुवार को सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी सरकार को कृषि संकट, कानून-व्यवस्था और मतदाता सूची के मुद्दों पर घेरा. भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि राज्य में आलू किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर हैं. सरकार उनकी मदद करने की बजाय आंखें मूंदे बैठी है.

बंगाल में कृषि आपातकाल, आलू किसानों की मौतों पर जतायी चिंता

शमिक भट्टाचार्य ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए जिलों में हो रही किसानों की आत्महत्या का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि कर्ज का भारी बोझ, प्राकृतिक आपदा और बाजार की अनियमितताओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है. उन्हें उपज का सही दाम नहीं मिल रहा. बाजार उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध बालू खनन से कृषि भूमि बंजर हो रही है. इससे उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आयी है.

सत्तारूढ़ दल के आपसी संघर्ष में जा रही जान

पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर प्रहार करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा अब नयी ऊंचाई पर पहुंच गयी है. उन्होंने दावा किया कि हाल के दिनों में सत्तारूढ़ दल (TMC) के भीतर चल रहे आपसी गुटीय संघर्ष के कारण कई लोगों की जान गयी है.

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शमिक भट्टाचार्य के आरोप और चुनाव आयोग से मांग

  • राम नवमी का मुद्दा : शमिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि राम नवमी के जुलूसों में जान-बूझकर बाधा डाली जा रही है. इससे सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है.
  • सुरक्षा की गुहार : शमिक भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग से अपील की है कि वे राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

मतदाता सूची में गड़बड़ी : फॉर्म-7 को लेकर गंभीर आरोप

मतदाता सूची के शुद्धिकरण (Voter List Purification) के लिए जारी SIR की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर शमिक भट्टाचार्य ने सवाल उठाये. उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से संदिग्ध नाम हटाने के लिए जमा किये जाने वाले ‘फॉर्म-7’ लेने से प्रशासन को रोका जा रहा है. कई जमा किये गये फॉर्मों का सही तरीके से निपटान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि जिन वैध मतदाताओं के नाम गलती से सूची से हट गये हैं, वे फॉर्म-6 के माध्यम से फिर से आवेदन जरूर करें.

Samik Bhattacharya: जनता सब देख रही है, चुनाव में मिलेगा जवाब

प्रेस वार्ता के अंत में शमिक भट्टाचार्य ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बंगाल की जनता वर्तमान स्थिति और सरकार की विफलताओं से भली-भांति अवगत है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस असंतोष का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजों में साफ तौर पर दिखाई देगा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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