तृणमृल कांग्रेस में बगावत, विधायकों और पार्टी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खोला मार्चा

Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आ चुका है. ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं. उनकी सरकार जा चुकी है. ममता के खिलाफ अब पार्टी में भी आवाज उठने लगी है. कई दिग्गज ममता से कन्नी काटने लगे हैं. पार्टी में टूट की आशंका बढ़ती जा रही है. ममता के लिए पार्टी को एकजुट रखना अब नई चुनौती बन गयी है.

Abhishek Banerjee: कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आ चुका है. बंगाल में सरकार जाने के बाद अब टीएमसी में घमासान शुरू हो गया है. ममता बनर्जी के लिए पार्टी को एकजुट रखना नयी चुनौती बन गयी है. पार्टी के कई दिग्गज ममता बनर्जी से कन्नी काटने लगे हैं. पार्टी के करीब एक दर्जन पदाधिकारियों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मुखर विरोध करना शुरू कर दिया है. टीएमसी के करीब आधा दर्जन विधायकों ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. टीएमसी पदाधिकारियों ने चुनाव में मिली करारी हार के लिए संगठनात्मक अहंकार और ज़मीनी स्तर से कटे होने को ज़िम्मेदार ठहराया है.

राज चक्रवर्ती ने राजनीति छोड़ी

बैरकपुर से तृणमूल के पूर्व विधायक और फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती ने घोषणा की कि वह राजनीति छोड़ रहे हैं. राज चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया पर एक नोट में कहा- मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2021 में हुई थी. लोगों ने मुझे काम करने का मौका दिया. अगले पांच वर्षों तक, मैंने उसी भावना के साथ एक विधायक के तौर पर अपने कर्तव्यों को पूरा करने की कोशिश जारी रखी. वह अध्याय 2026 में समाप्त हो गया. इसके साथ ही, राजनीतिक जीवन में मेरी यात्रा भी समाप्त हो गई है. भाजपा को उसकी जीत पर बधाई देते हुए, देव ने आने वाले प्रशासन से बंगाल के फिल्म उद्योग के भीतर सौहार्द बनाए रखने और कलात्मक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की अपील की.

विकास रॉय चौधरी ने आई पैक को बताया जिम्मेदार

बीरभूम से तृणमूल के पूर्व विधायक विकास रॉय चौधरी ने पार्टी के ढांचे के भीतर राजनीतिक सलाहकारों के बढ़ते प्रभाव को हार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने पार्टी को एकजुट रखा, लेकिन I-PAC कुछ ऐसे गैर-बंगाली लड़कों को ले आया, जिन्होंने हमें लेक्चर देना शुरू कर दिया. कूच बिहार में तृणमूल के वरिष्ठ पदाधिकारी और पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष को इस चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था. उन्होंने कहा कि मुझे हमेशा लगा कि राज्य स्तर पर पार्टी दो गुटों में बंट गई थी. एक तरफ दीदी थीं, और दूसरी तरफ अभिषेक. उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है कि अभिषेक दीदी पर अपने फैसलों को मनवाने के लिए दबाव डालते थे. नतीजतन, दीदी अपने स्वाभाविक फैसले नहीं ले पाती थीं.

सुजॉय चक्रवर्ती का इस्तीफा

सुजॉय चक्रवर्ती के इस्तीफे से तृणमूल कांग्रेस में संकट और गहरा गया. हावड़ा नगर निगम के प्रशासक मंडल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुजॉय चक्रवर्ती ने पार्टी से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी. चक्रवर्ती ने अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया कि पिछले साल उन्होंने उन पर अपने नागरिक पद से इस्तीफ़ा देने का दबाव डाला था, क्योंकि वे पार्टी फंड के लिए ठेकेदारों और व्यापारियों से पैसे इकट्ठा करने को तैयार नहीं थे. पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मंत्री मनोज तिवारी ने इससे पहले बगावत के सुर दिखाए थे. उन्होंने भी तृणमूल नेतृत्व और पूर्व खेल मंत्री अरूप बिश्वास पर ज़ोरदार हमला बोला. मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि हावड़ा में विकास कार्यों को पार्टी के भीतर गुटबाज़ी और असुरक्षा की भावना के कारण जानबूझकर रोका गया.

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रिजू दत्ता ने साधा निशाना

तृणमूल के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने भी पार्टी नेतृत्व के प्रति सार्वजनिक रूप से अपनी हताशा व्यक्त की, जब उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद भाजपा समर्थकों ने उनके परिवार पर हमला किया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो में रिजू दत्ता ने हाथ जोड़कर विनती करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान उन्हें शुभेंदु अधिकारी पर व्यक्तिगत हमले करने के लिए मजबूर किया गया था. अपने कार्यों के लिए माफी मांगते हुए उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा की गई 99% टिप्पणियां मेरी अपनी नहीं थीं. मैंने पार्टी के निर्देश पर ऐसा किया था.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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