खास बातें
Pakistan Media on Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक जीत की गूंज सरहद पार पाकिस्तान में भी सुनाई दे रही है. पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों ने ममता बनर्जी की हार पर विस्तृत चर्चा करते हुए इसे भारतीय राजनीति का ‘बड़ा टर्निंग प्वाइंट’ बताया है.
अमित शाह को बताया बंगाल चुनाव का ‘मैन ऑफ द मैच’
पाकिस्तानी जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी, जो विपक्षी गठबंधन की सबसे चमकती सितारा थीं, भाजपा की चाणक्य नीति के सामने धराशायी हो गयीं. चर्चा के केंद्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे, जिन्हें इस जीत का ‘मैन ऑफ द मैच’ करार दिया गया है.
पाकिस्तानी विश्लेषकों की नजर में ममता की हार के 3 बड़े कारण
पाकिस्तानी मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हुई इस चर्चा में दीदी की हार के पीछे कई महत्वपूर्ण तर्क दिये गये हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी को केंद्र में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के सबसे मजबूत चेहरे के रूप में देखा जा रहा था. बंगाल में उनकी हार ने न केवल टीएमसी को कमजोर किया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के दावों को भी बड़ा झटका दिया है. इसमें 3 सबसे बड़े कारण इस प्रकार हैं.
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1. अमित शाह की मैदानी रणनीति
पाकिस्तानी जानकारों ने अमित शाह की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बंगाल के कोने-कोने में भाजपा का जो ढांचा खड़ा किया, उसका तोड़ ममता बनर्जी के पास नहीं था. बूथ मैनेजमेंट से लेकर आक्रामक प्रचार तक, शाह ने ‘मैन ऑफ द मैच’ वाली भूमिका निभायी.
2. भ्रष्टाचार और एंटी-इनकंबेंसी
चर्चा में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि 15 साल के लंबे शासन के बाद जनता के बीच पैदा हुआ आक्रोश और भ्रष्टाचार के आरोपों ने टीएमसी के ‘किले’ में सेंध लगाने का काम किया.
3. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान का जिक्र
पाकिस्तानी विश्लेषकों ने चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह के बयानों, विशेषकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर उनके कड़े रुख का भी जिक्र किया. उनका मानना है कि भाजपा ने सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दे को बंगाल की जमीन पर सफलतापूर्वक उतारा, जिससे मतदाताओं का ध्रुवीकरण हुआ और टीएमसी का पारंपरिक वोट बैंक खिसक गया.
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Pakistan Media on Bengal Election Results 2026: विपक्षी गठबंधन के भविष्य पर सवाल
पाकिस्तानी मीडिया में इस बात पर भी बहस हुई कि ममता बनर्जी की हार के बाद क्या कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल उन्हें अपना नेता स्वीकार करेंगे? विश्लेषकों ने कहा- ममता विपक्षी सितारों के मंडल में सबसे चमकदार तारा थीं, लेकिन अब उनके अपने ही घर में हार जाने से विपक्षी खेमे में नेतृत्व का संकट गहरा जायेगा.
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पाकिस्तान ने माना- मोदी-शाह की जोड़ी का चुनावी गणित अचूक
यह पहली बार नहीं है, जब भारतीय चुनावों पर पाकिस्तान में इतनी गहरी दिलचस्पी दिखायी गयी हो, लेकिन बंगाल में ‘दीदी’ के पतन ने वहां के बुद्धिजीवियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मोदी-शाह की जोड़ी का चुनावी गणित कितना अचूक है. पाकिस्तान में भी लोग मान रहे हैं कि 2026 के इन नतीजों ने 2029 की राह भाजपा के लिए काफी आसान कर दी है.
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