Election Commission Model Code of Conduct: देश के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में चुनावी शोर थमने और सरकार के फैसले होने के बाद अब प्रशासन के लिए राहत की बड़ी खबर आयी है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बृहस्पतिवार को आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लागू आदर्श आचार संहिता (MCC) तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गयी है. 15 मार्च से लागू इन पाबंदियों के खत्म होने के साथ ही अब इन राज्यों में रुके हुए सरकारी कामकाज और विकास योजनाओं को गति मिल सकेगी. हालांकि, पश्चिम बंगाल के लिए आयोग ने एक छोटा सा पेच भी रखा है.
कहां-कहां खत्म हुई पाबंदियां?
निर्वाचन आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद आचार संहिता निष्प्रभावी हो गयी है. गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की उन विधानसभा सीटों पर भी पाबंदियां हट गयी हैं, जहां उपचुनाव हुए थे.
बंगाल के फालता में अब भी जारी रहेगी सख्ती
भले ही पूरे राज्य से आचार संहिता हट गयी हो, लेकिन पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर अभी भी कड़ाई जारी रहेगी. फालता सीट पर चुनाव आयोग ने नये सिरे से मतदान (Re-polling) कराने के आदेश दिया हैं. जब तक फालता सीट पर चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और नतीजे नहीं आ जाते, वहां के प्रशासनिक क्षेत्रों में आचार संहिता के नियम लागू रहेंगे.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
Election Commission Model Code of Conduct: 15 मार्च से थमा था विकास का पहिया
इन राज्यों में 15 मार्च से ही चुनाव आचार संहिता लागू थी, जिसके कारण सरकारें कोई भी नयी घोषणा या विकास कार्य शुरू नहीं कर पा रही थीं. चुनाव की पूरी प्रक्रिया 9, 23 और 29 अप्रैल को संपन्न हुई. 4 मई को आये नतीजों ने सत्ता की तस्वीर साफ कर दी. अब आचार संहिता हटने के बाद नयी सरकारों के लिए कामकाज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
इसे भी पढ़ें
ममता बनर्जी को धूल चटाने के बाद शुभेंदु अधिकारी का 60 फीसदी वोट और 100 साल तक सरकार का दावा
बंगाल का अगला बॉस कौन? शुभेंदु अधिकारी को शमिक, सुकांत और स्वपन दासगुप्ता दे रहे टक्कर
