सीपीआइ एमएल ने शिक्षकों को बचाने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप का किया अनुरोध

भट्टाचार्य ने एक पत्र में कहा कि यह बर्खास्तगी भर्ती प्रक्रिया में प्रणालीगत भ्रष्टाचार के लिए एक “सामूहिक दंड” है.

कोलकाता/नयी दिल्ली. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में लगभग 26,000 शिक्षकों को बर्खास्त करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर शिक्षकों को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है. श्री भट्टाचार्य ने एक पत्र में कहा कि यह बर्खास्तगी भर्ती प्रक्रिया में प्रणालीगत भ्रष्टाचार के लिए एक “सामूहिक दंड” है. पत्र की एक प्रति उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की. उन्होंने कहा, “न्यायालय और सरकार दोनों ने यह स्वीकार किया कि अब बर्खास्त किये गये अधिकतर शिक्षकों ने निष्पक्ष तरीके से अपनी नौकरी प्राप्त की थी, लेकिन अब वे सभी 25,753 शिक्षक, जिन्हें भ्रष्ट भर्ती प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, उनसे उनकी सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका का एकमात्र स्रोत छीन लिया गया है.”

उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि हजारों परिवार बिना किसी गलती के असहनीय पीड़ा झेल रहे हैं. यह अनगिनत छात्रों के लिए घोर अराजकता की स्थिति है और राज्य द्वारा संचालित सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को एक बड़ा झटका लगा है, जो पहले से ही शिक्षा की उपेक्षा और व्यवस्थित निजीकरण के कारण वर्षों पहले से कमजोर हो चुकी है और जिसे विशेष रूप से नयी शिक्षा नीति ने गहरा आघात पहुंचाया है.” भाकपा (माले) नेता ने कहा कि शिक्षा और परीक्षा माफिया का उदय, पेपर लीक और भर्ती घोटालों का बढ़ना चिंता का विषय है. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि बर्खास्तगी व्यवस्थित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का जवाब नहीं हो सकती. उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया, “हम आपसे अपील करते हैं कि आप तत्काल हस्तक्षेप करें और पीड़ित शिक्षकों, उनके परिवारों और आश्रितों को बचाने के लिए कोई रास्ता निकालें तथा पीड़ितों को परेशान किये बिना शिक्षा, परीक्षा और भर्ती की संकटग्रस्त प्रणाली में सुधार लाने में मदद करें.”

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By SANDIP TIWARI

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