कोलकाता
. राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को आनंदपुर के नाजिराबाद में अग्निकांड स्थल का दौरा किया. उन्होंने नाजिराबाद-आनंदपुर वेयरहाउस में लगी भयावह आग को लेकर राज्य सरकार पर लापरवाही, कायरता और तानाशाही रवैये का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यहां फलों के पैकेट में देहांश भर कर हटाये जा रहे हैं. लोगों के शव इसी प्रकार छिपाये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस अग्निकांड में मृतकों की संख्या 35-40 के बीच हो सकती है, लेकिन राज्य सरकार सही आंकड़े नहीं दे रही. उन्होंने राज्य के दमकल मंत्री के इस्तीफे की मांग की. साथ ही कहा कि आखिर मुख्यमंत्री अब तक यहां क्यों नहीं पहुंचीं.शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस भयावह अग्निकांड में अब तक 20 से अधिक निर्दोष लोगों की जान जा चुकी हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं. जले हुए शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच जारी है. इस घटना ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है और औद्योगिक व अग्नि सुरक्षा को लेकर सरकार की घोर विफलता को उजागर किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि खतरनाक सामग्री से भरे कई गोदाम बिना एनओसी और फायर सेफ्टी ऑडिट के अवैध रूप से संचालित हो रहे थे.
लोकतंत्र का गला घोंट रही राज्य सरकारशुभेंदु का कहना है कि यह आदेश उन्हें घटनास्थल पर जाने, पीड़ित परिवारों से मिलने, उन्हें सांत्वना देने और सरकार की आपराधिक लापरवाही के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध मार्च का नेतृत्व करने से रोकने के लिए एक सोची-समझी साजिश है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि सरकार जानती है कि जैसे ही वह नाजिराबाद या नरेंद्रपुर पहुंचेंगे, जनता का गुस्सा फूट पड़ेगा और ममता सरकार की विफलताएं उजागर हो जायेंगी. शुभेंदु ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र का गला घोंटने की राज्य प्रायोजित कोशिश है.
त्रासदी के लिए सीएम, दमकल मंत्री व भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था जिम्मेदारभाजपा विधायक ने कहा कि इस पूरी त्रासदी की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस और पूरी भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अब तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचीं, जबकि अग्निशमन मंत्री 32 घंटे की देरी से मौके पर पहुंचे. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहत और बचाव कार्य समाप्त होने के बाद इलाके का दौरा करना चाहते थे. लेकिन जवाबदेही तय करने के बजाय तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सच्चाई और विपक्ष की आवाज दबाने का रास्ता अपनाया. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163(दो) के तहत निषेधाज्ञा लागू कर 28 जनवरी शाम पांच बजे से 30 मार्च 2026 तक घटनास्थल के 100 मीटर के दायरे में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गयी है.
