तृणमूल का आरोप, चुनाव आयोग ने की सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना

तृणमूल कांग्रेस ने ‘फॉर्म-7’ को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है. सोमवार को यहां तृणमूल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रवक्ता कुणाल घोष ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाये.

कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस ने ‘फॉर्म-7’ को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है. सोमवार को यहां तृणमूल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रवक्ता कुणाल घोष ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाये. भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि ‘फॉर्म-7’ के जरिये वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने सवाल किया कि सुनवाई के दौरान संबंधित लोगों को नोटिस क्यों नहीं दिया गया. उनका आरोप है कि अब बड़ी संख्या में उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने सरकारी आवास योजना के तहत दस्तावेज जमा किये हैं.

उन्होंने कहा कि 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये फैसले की अनदेखी की जा रही है. अगर चुनाव आयोग को किसी प्रकार का संदेह था तो उसे सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए था, न कि अपने स्तर पर व्याख्या कर राज्य के लोगों को संकट में डालना चाहिए. तृणमूल इस मुद्दे पर कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रही है.

वहीं, कुणाल घोष ने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है और पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने सीमा सुरक्षा और बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को लेकर विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी की टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की.

तृणमूल नेताओं ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के इस रुख के खिलाफ वह अंतिम स्तर तक संघर्ष करेगी और आवश्यकता पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटायेगी.

एसआइआर में दोहरा मानदंड अपनाने का लगाया आरोप

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाये हैं. सोमवार को सोशल मीडिया पर पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी करके कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अलग और कड़े मानदंड अपनाये जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में अलग व्यवस्था लागू है. तृणमूल ने इसे दोहरा रवैया करार दिया है और आशंका जतायी है कि इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम को हटाना हो सकता है. तृणमूल ने कहा कि चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था होने के नाते निष्पक्षता और पारदर्शिता बनायी रखनी चाहिए. पार्टी ने नौ फरवरी के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया था कि नोटिस प्राप्त व्यक्ति आयोग द्वारा संदर्भित सभी या किसी भी दस्तावेज पर भरोसा कर सकते हैं, जिनमें 19 जनवरी के आदेश में उल्लेखित दस्तावेज भी शामिल हैं. तृणमूल का आरोप है कि इसके बावजूद सरकारी आवास योजनाओं के तहत जारी वित्तीय स्वीकृति पत्रों को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है. पार्टी का कहना है कि इससे पात्र मतदाताओं में भय और अनिश्चितता का माहौल बन रहा है. पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व प्रत्येक योग्य नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना है, न कि किसी राजनीतिक दल के हित में काम करना है.

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Published by: Bijay kumar

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