राज्य के सभी पुलों की स्वास्थ्य जांच करेगा पीडब्ल्यूडी

सितंबर 2018 में माझेरहाट ब्रिज के अचानक ढह जाने से सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.

कोलकाता. सितंबर 2018 में माझेरहाट ब्रिज के अचानक ढह जाने से सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इस घटना से सबक लेते हुए राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने छोटे-बड़े सभी पुलों की स्वास्थ्य जांच कराने का निर्णय लिया है. बता दें कि हर साल मॉनसून से पहले राज्य के सभी पुलों की स्वास्थ्य जांच की जाती है. लेकिन इस बार राज्य लोक निर्माण विभाग विशेष सक्रियता दिखा रहा है. वर्तमान में विभाग के अधीन 2,200 से अधिक पुल हैं. इनमें से लगभग 150 उत्तर बंगाल में हैं. विभागीय अधिकारी उन पुलों की स्थिति का पता लगा रहे हैं. विभाग उन सभी पुलों की वर्तमान स्थिति जानना चाहता है जो हल्के, मध्यम से लेकर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं. इसीलिए हाल ही में सभी पुलों के तत्काल निरीक्षण का आदेश जारी किया गया है. यह कार्य 30 अप्रैल तक पूरा करना है. यह निर्णय तीन अप्रैल को राज्य सचिवालय नबान्न में लोक निर्माण मंत्री पुलक राय और विभागीय सचिव अंतरा आचार्य की उपस्थिति में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया. बैठक में विभागीय अधिकारियों ने प्रत्येक पुल की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की. निरीक्षण के बाद प्रत्येक पुल की जानकारी 30 अप्रैल तक ‘समीक्षा’ पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है. राज्य के तीनों जोन पूर्व, पश्चिम और दक्षिण के मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में कार्य की प्रगति की निगरानी करने और आवश्यक कदम शीघ्र उठाने के निर्देश दिये गये हैं. लोक निर्माण विभाग के एक सूत्र ने बताया कि एक बार सभी रिपोर्ट प्राप्त हो जाने पर, उन सभी पुलों पर तुरंत ऊंचे बैरिकेड्स लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाये जायेंगे, जहां पहले से एहतियाती उपाय नहीं किये गये हैं. गौरतलब है कि माझेरहाट ब्रिज चार सितंबर 2018 को ढह गया था. इसके बाद राज्य सरकार ने पुल को पूरी तरह से ध्वस्त कर फिर से बनाने का फैसला किया था. कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लॉकडाउन की स्थिति के कारण पुल निर्माण कार्य प्रभावित हुआ. नये माझेरहाट ब्रिज का उद्घाटन 3 दिसंबर 2020 को हुआ था. उस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुल का उद्घाटन किया और इसका नाम बदलकर ””””जय हिंद ब्रिज”””” रखा. यह नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के अवसर पर दिया गया था. यह पुल लगभग 650 मीटर लंबा है और 385 टन भार उठाने में सक्षम है. पुल का 227 मीटर हिस्सा एक निलंबित संरचना पर बनाया गया है, जिसमें से 100 मीटर हिस्सा रेलवे लाइन से ऊपर स्थित है. हालांकि पुल निर्माण कार्य काफी तेजी से पूरा हुआ, लेकिन लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल उठे. इस पुल के ढहने से बेहला शहर और कोलकाता के बीच सीधा सड़क संपर्क टूट गया, साथ ही दक्षिण 24 परगना का एक बड़ा क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ. लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ऐसी स्थिति नहीं चाहते. स्थिति को समझते हुए न्यू अलीपुर स्थित डेरोजियो ब्रिज पर ऊंचाई सीमा लगा दी गयी है और भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गयी है. लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि माझेरहाट पुल दुर्घटना के बाद से सरकार पुलों के निरीक्षण को विशेष महत्व दे रही है. इस बार भी मॉनसून आने से पहले हम सभी पुलों की जांच करवाना चाहते हैं और एहतियाती कदम उठाना चाहते हैं, ताकि कोई खतरा पैदा न हो. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के पास इन 2,200 पुलों की स्वास्थ्य जांच करने के लिए बुनियादी ढांचा है? इस तरह के सवाल के जवाब में लोक निर्माण विभाग के एक सूत्र ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के प्रमुखों ने इस संबंध में काम में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए कई बैठकें शुरू कर दी हैं. राज्य के 12 जिलों में ऐसी बैठकें पहले ही हो चुकी हैं.

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Published by: Subodh kumar singh

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