महालया पूर्व प्रतिमा दर्शन के लिए किया टिकट का प्रावधान

दुर्गापूजा मंडप दर्शन की परंपरा में नया आयाम जोड़ने की तैयारी

दुर्गापूजा मंडप दर्शन की परंपरा में नया आयाम जोड़ने की तैयारी कोलकाता. बंगाल की दुर्गापूजा, जिसे यूनेस्को द्वारा हेरिटेज का दर्जा दिया गया है, में इस बार एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. अब कुछ पूजा पंडालों में प्रतिमा दर्शन के लिए टिकट लेना होगा. यह कदम लोगों के लिए एक नया अनुभव होगा, क्योंकि पारंपरिक रूप से बंगाल के लोग रात भर कतारों में खड़े होकर बिना किसी शुल्क के मंडपों में प्रतिमाओं के दर्शन का आनंद लेते आये हैं. कोलकाता और आसपास की तीन प्रमुख पूजा कमेटियों ने इसकी घोषणा की है: बालीगंज कल्चरल, दमदम पार्क भारत चक्र व केंदुआ शांति संघ. इन पंडालों में महालया से पहले अगर कोई प्रतिमा दर्शन के लिए आता है, तो उसे टिकट खरीदना होगा. दर्शन के लिए समय भी निर्धारित किया गया है. तीनों ही पंडपों में प्रतिमाओं का निर्माण मूर्तिकार सुशांत शिवानी पाल ने किया है. विवाद और प्रतिक्रिया: कुछ लोगों का कहना है कि कला प्रदर्शनियों के लिए टिकट खरीदे जा सकते हैं, लेकिन कुछ का मानना है कि इससे बंगालियों की पुरानी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी. भाजपा पार्षद सजल घोष ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पूजा का सार नष्ट हो जायेगा और मतभेद पैदा होंगे. क्यों लिया गया यह फैसला बालीगंज कल्चरल पूजा कमेटी के अंजन वकील ने बताया कि बंगाल की दुर्गा पूजा देखने के लिए अब विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं. कई बुजुर्ग भी आते हैं, जिनके लिए भीड़ में पूजा देखना संभव नहीं हो पाता. उन्हें भीड़ में कला का आनंद लेने या तस्वीरें व सेल्फी लेने का अवसर नहीं मिलता. इन लोगों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है. उनका तर्क है कि अगर विदेशों में किसी भी उत्सव में प्रवेश के लिए टिकट खरीदने की व्यवस्था है, तो बंगाल की दुर्गा पूजा में क्यों नहीं. कब और कैसे मिलेगा टिकट यह टिकट व्यवस्था केवल महालया से पहले लागू होगी. महालया 21 सितंबर को है. आपको 19, 20 और 21 सितंबर को इन तीनों पूजा मंडपों में प्रवेश के लिए टिकट खरीदना होगा. टिकट ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं. प्रतिमा के दर्शन का समय शाम छह बजे से सुबह तीन बजे तक निर्धारित किया गया है. टिकट की कीमतें एक व्यक्ति 100 रुपये, दो लोग, 150 रुपये, तीन लोग 200 रुपये और चार लोग 300 रुपये. मूर्तिकार सुशांत शिवानी पाल ने स्पष्ट किया है कि बंगाल की दुर्गा पूजा सार्वभौमिक ही रहेगी. महालया के बाद सभी लोग बिना टिकट प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे. यह व्यवस्था सिर्फ देवी पक्ष से पहले कला को लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने के लिए है.

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Published by: Sandip tiwari

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