एचएमसी में बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर की कमेटी भंग होने से बढ़ीं मुश्किलें

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आदेश के बाद वर्ष 2021 में हावड़ा नगर निगम (एचएमसी) का कामकाज संभालने के लिए बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर की एक कमेटी गठित की गयी

निगम आयुक्त को दी गयी 50 वार्डों का कामकाज संभालने की जिम्मेवारी

कई योजनाओं पर संकट के बादल

संवाददाता, हावड़ा.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आदेश के बाद वर्ष 2021 में हावड़ा नगर निगम (एचएमसी) का कामकाज संभालने के लिए बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर की एक कमेटी गठित की गयी. यह कमेटी बनाये जाने के बाद सरकार का रुख साफ हो गया कि अभी सत्ता पक्ष निगम चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है. बहरहाल, विधानसभा चुनाव के दौरान मध्य हावड़ा में सीएम ममता बनर्जी की चुनावी सभा से राजनीति की मैदान में एंट्री करने वाले डॉ सुजय चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा. चुनाव जीतने के बाद राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी. तीसरी बार ममता बनर्जी सीएम बनीं. इसके कुछ दिनों बाद सीएम ने डॉ चक्रवर्ती पर विश्वास दिखाते हुए बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर का चेयरमैन और दक्षिण हावड़ा तृणमूल कांग्रेस के तृणमूल नेता व पूर्व पार्षद सैकत चौधरी को वाइस चेयरमैन बनाया. इस कमेटी में कुल आठ सदस्य थे. चेयरमैन डॉ चक्रवर्ती शहर की व्यवस्था को ठीक करने के लिए अपने सदस्यों के साथ लगातार प्रयास कर रहे थे कि अचानक पहले वाइस चेयरमैन और बाद में चेयरमैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. सूत्रों की मानें तो, दोनों को पार्टी की तरफ से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था. आखिर, इस्तीफा क्यों मांगा गया, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है. बताया जाता है कि दुर्गापूजा के पहले तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने हावड़ा के सभी नेताओं के साथ बैठक की थी. इस बैठक में उन्होंने दोनों पर नाराजगी जाहिर की थी. दोनों के इस्तीफा देते ही बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन की कमेटी भंग कर दी गयी. अभी निगम आयुक्त वंदना पोखरीवाल बतौर प्रशासक निगम का कामकाज देख रही हैं.

हालात बिगड़ने की आशंका

सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि बोर्ड ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर कामकाज संभाल रहा था, पर अब एक शख्स के लिए पूरे निगम का काम देखना असंभव है. इससे हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गयी है.

विपक्ष का आरोप : भाजपा के जिला सचिव व वकील ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि दोनों को इसलिए इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि वे लोग कट मनी तृणमूल महासचिव को नहीं देकर अपने पास ही रख रहे थे. कट मनी नहीं दिये जाने पर तृणमूल के नेता एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं. उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक शहर को यहां की सरकार ने बर्बाद करके रख दिया है.

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Published by: Subodh kumar singh

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