नेताजी की मौत की जांचवाली जनहित याचिका हुई खारिज

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के मामले की जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज कर दी.

सुप्रीम कोर्ट बोला: अदालत के पास हर चीज का समाधान नहीं

एजेंसियां, नयी दिल्लीउच्चतम न्यायालय ने सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के मामले की जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत हर चीज का समाधान नहीं है. पीठ ने कहा कि सरकार चलाना अदालत का काम नहीं है. शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि याचिका में उन नेताओं के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक और गैरजिम्मेदाराना आरोप लगाये गये हैं, जो अब जीवित नहीं हैं. याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा है. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की प्रामाणिकता की जांच की जानी आवश्यक है. न्यायालय ने याचिकाकर्ता पिनाक पाणि मोहंती से पूछा कि उन्होंने जनहित में और लोगों के मानवाधिकारों के लिए क्या काम किया है. मोहंती ने अपनी याचिका में कहा है कि वह वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन (इंडिया) के कटक जिला सचिव हैं. सरकार ने इससे पहले एक आरटीआइ (सूचना का अधिकार) के तहत मांगी गयी सूचना के जवाब में बताया था कि नेताजी की मृत्यु 1945 में ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुई थी.

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