देश के किशोरों में पोषण की कमी एक गंभीर समस्या

डॉ मुखर्जी ने बताया कि जहां कुछ किशोर कम वजन से परेशान हैं, वहीं कई किशोर अधिक वजन और मोटापे की बढ़ती चुनौती से जूझ रहे हैं.

हर साल एक से सात सितंबर तक मनाया जाता है राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

कोलकाता. किशोरावस्था मानव विकास का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन देश में किशोरों के बीच पोषण की कमी एक गंभीर समस्या बन गयी है. यह बात फोर्टिस अस्पताल आनंदपुर की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ श्रावणी मुखर्जी ने बतायी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार, किशोरों का एक बड़ा हिस्सा कुपोषण, एनीमिया और विटामिन की कमी का सामना कर रहा है. डॉ मुखर्जी ने बताया कि जहां कुछ किशोर कम वजन से परेशान हैं, वहीं कई किशोर अधिक वजन और मोटापे की बढ़ती चुनौती से जूझ रहे हैं. यह समस्या अस्वास्थ्यकर खान-पान, पोषण संबंधी जानकारी की कमी और कैलोरी से भरपूर, लेकिन पोषक तत्वों से रहित खाद्य पदार्थों की आसान उपलब्धता के कारण और भी गंभीर हो जाती है. इस संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल एक से सात सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है.

खराब खान-पान से होने वाले नुकसान : डॉ मुखर्जी के अनुसार, किशोर अक्सर तले हुए स्नैक्स, पैकेज्ड फास्ट फूड और मीठे पेय पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं. ये चीजें स्वाद और सुविधा के लिए तो अच्छी हैं, लेकिन इनमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है. समय के साथ इस तरह के खान-पान से एनीमिया, शारीरिक विकास में रुकावट, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और भविष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप व मोटापे जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियां हो सकती हैं.

समाधान और जागरूकता पर जोर

इस समस्या से निपटने के लिए एक बहु-स्तरीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है. डॉ मुखर्जी ने सुझाव दिया कि स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाये जाने चाहिए ताकि युवाओं को उनके भोजन के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जा सके. उन्होंने कहा कि पौष्टिक भोजन के विकल्प आसानी से उपलब्ध और किफायती होने चाहिए. मौसमी फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, डेयरी उत्पाद और मेवों से भरपूर आहार न केवल शारीरिक विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ाते हैं, जो किशोरों के लिए उनके शैक्षणिक और अन्य गतिविधियों में संतुलन बनाये रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं.

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By GANESH MAHTO

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