किसी भी विदेशी का नाम मतदाता सूची में बर्दाश्त नहीं : चुनाव आयोग

निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि अंतिम वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

चेतावनी. सीइसी ने की मुख्य चुनाव अधिकारी व जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक

दिया निर्देश: एसआइआर रिकॉर्ड को पांच साल तक सहेज कर रखें

संवाददाता, कोलकातानिर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि अंतिम वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. यह तय होना चाहिए कि इस सूची में किसी भी िवदेशी का नाम शामिल न हो. यह भी कहा गया है कि किसी भी वैध वोटर का नाम न छूटे. ये बातें शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी व जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में कहीं. उन्होंने कहा कि अगर पांच साल बाद भी अंतिम मतदाता सूची में किसी विदेशी की पहचान होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी. इन सभी दस्तावेजों को पांच वर्षों तक सहेज कर रखें.

बैठक में ये भी रहे मौजूद

बैठक में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, जिला चुनाव अधिकारी (डीइओ), इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (इआरओ) व असिस्टेंट इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर भी मौजूद थे.

जो दस्तावेज स्वीकार्य नहीं, वे कैसे जमा लिये गये, होगी कार्रवाई

राज्य के ज्यादातर जिलों में एसआइआर सुनवाई का काम पूरा हो चुका है. दस्तावेजों की जांच की जा रही है. आयोग ने इस काम के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. बैठक में यह भी कहा गया है कि अगर कोई डीइओ, इआरओ या एइआरओ नियमों का उल्लंघन करता है या कोई गलती हो जाती है, तो आयोग को इसकी जानकारी देनी होगी. कई मामलों में देखा गया है कि सुनवाई में जमा किये गये दस्तावेज पढ़ने लायक नहीं हैं. कुछ ने ऐसे दस्तावेज जमा किये हैं, जिन्हें मंजूर नहीं किया जा सकता. आयोग ने पूछा कि ये दस्तावेज जमा कैसे लिये गये. इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं, आयोग को उनकी जानकारी भेजें, ताकि संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जा सके. मुख्य चुनाव आयुक्त ने इसे लेकर निर्देश भी दिया. किसी भी तरह की गड़बड़ी पाये जाने पर आयोग इन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा. जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इसका आइएएस अधिकारी के लंबे करियर पर बुरा असर पड़ सकता है.

सोमवार शाम पांच बजे तक डीइओ करेंगे दस्तावेजों की जांच

चुनाव आयोग ने कई दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाये. सुनवाई के दौरान जो दस्तावेज लिये गये हैं, वे आयोग द्वारा स्वीकृत दस्तावेज हैं या नहीं, डीइओ को निजी स्तर पर जांच कर कंफर्म करना होगा. इसके लिए आयोग ने सोमवार पांच बजे तक का समय दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कर दिया कि इसके बाद भी यदि कोई अमान्य दस्तावेज आयोग के सिस्टम में दिखेगा, तो संबंधित जिलाधिकारी इसके लिए खुद जिम्मेदार होंगे. आयोग अपने हिसाब से आगे की कार्रवाई करेगा. बैठक के दौरान आयोग के अधिकारियों ने सवाल उठाया कि फर्जी व तैयार किये गये दस्तावेजों को अपलोड करने के मकसद से ही अमान्य दस्तावेजों को जमा किया गया है. कई मामलों में देखा गया है कि अखबार की कटिंग्स, खाली पन्ने या साफ नहीं दिखने व पढ़े जानेवाले दस्तावेज भी जमा कर दिये गये हैं. इन्हें भी अपलोड किया गया है. आयोग ने इस पर नाराजगी दिखायी.

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