कोलकाता. एनसीपीआई के तीन मुस्लिम सांसदों के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में लौटने को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं. पिछले सप्ताह एनडीए की बैठक में इन सांसदों की अनुपस्थिति और सौगता रॉय की संदिग्ध टिप्पणियों ने इन अटकलों को और हवा दी. अब एनसीपीआई में शामिल हुए तीन सांसदों अबू ताहेर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने काकली गुट की बेचैनी और बढ़ा दी है. वे आज एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए. इतना ही नहीं, अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने अपना राजनीतिक रुख भी स्पष्ट कर दिया है.
अबू ताहेर की बड़ी घोषणा
अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने स्पष्ट कर दिया है कि वे एनसीपीआई में तो हैं, लेकिन एनडीए में नहीं हैं. वे किसी भी हालत में भाजपा के साथ नहीं जा सकते. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा है कि अगर कोई विधेयक मुसलमानों के हितों के खिलाफ आता है, तो वे उसका भी विरोध करेंगे. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनके अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक जिम्मेदारियां हैं. उम्मीद थी कि वे वहां की जनसंख्या के अनुपात में अपनी राजनीतिक स्थिति तय करेंगे.
एनसीपीआई सांसदों का भविष्य पर संकट
पिछले हफ्ते, काकली और शास्त्राना को पहली बार एनडीए की बैठक में सहयोगी के तौर पर आमंत्रित किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बैठक में उनका परिचय सहयोगी सांसदों के रूप में कराया. हालांकि, बैठक में तीन मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर अटकलें शुरू हो गईं. सूत्रों का कहना है कि अगर खलीलुर और अबू ताहेर एनसीपीआई में शामिल भी हो जाते हैं, तो भी वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे.
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कई सांसदों की घर वापसी के दावे
इस बीच, संसद परिसर में खलीलुर और अबू ताहेर की सौगत रॉय से हुई बातचीत को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं. सौगत रॉय ने दावा किया कि कई सांसद उनके संपर्क में हैं. इस सूची में तीन अल्पसंख्यक सांसद भी शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल से लेकर एनसीपी और एनडीए तक, कई लोग इसे पसंद नहीं कर रहे हैं. दूसरे शब्दों में, उन्होंने कहा कि कई लोग एनडीए में शामिल होने की बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. अब अबू ताहेर और खलीलुर रहमान ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है.
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