बांग्लादेश की सरकार लोकतंत्र के मूलभूत आदर्शों से दूर चली गयी है

महानगर में आयोजित एक शैक्षणिक संगोष्ठी में बोले रवींद्र घोष घोष

चिन्मय कृष्ण दास के वकील ने कहा: अदालत में उन्हें किया गया परेशान

महानगर में आयोजित एक शैक्षणिक संगोष्ठी में बोले रवींद्र घोष घोष

कोलकाता.बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर मानवाधिकारों के उल्लंघन पर ऑल इंडिया लीगल एड फोरम (एआइएलएएफ) द्वारा गुरुवार को महानगर में एक शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. मौके पर बांग्लादेश में गिरफ्तार इस्कॉन के संन्यासी चिन्मय कृष्ण दास का बचाव करने वाले बांग्लादेश के प्रमुख वकील रवींद्र घोष ने बताया कि बांग्लादेश में लगातार सरकारें समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित लोकतंत्र के देश के मूलभूत आदर्शों से दूर चली गयी हैं. गौरतलब है कि श्री घोष, जिन्हें कथित तौर पर चिन्मय कृष्ण दास की ओर से चटगांव मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश होने की कोशिश करते समय परेशान किया गया और हमले किये गये. गुरुवार को महानगर में आयोजित कार्यक्रम में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के वकील ने कहा कि पीड़ित हिंदू की ओर से उन्होंने कई मामलों की पैरवी की. उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि इसी तरह के मामलों में एक मुस्लिम समुदाय के आरोपी को जमानत दी गयी थी. सभी आधार एक जैसे हैं. मैंने तब पूछा कि एक हिंदू को जमानत क्यों नहीं दी जा सकती, लेकिन न्यायाधीश ने कोई फैसला नहीं सुनाया. उन्होंने कहा कि मुझे एक मंदिर की सुरक्षा से संबंधित एक केस वापस लेने के लिए मजबूर किया गया. हमने 3000 ऐसे मामले दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने हमारी मदद नहीं की. मंच ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और बांग्लादेश सरकार से हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करने, उनके खिलाफ हिंसा को रोकने, इन घटनाओं की गहन जांच करने और इसमें शामिल हिंदू धार्मिक नेताओं को रिहा करने का आह्वान किया. संगोष्ठी में ब्रिगेडियर देबाशीष दास और कर्नल सौमित्र रॉय समेत कई पूर्व भारतीय सेना अधिकारी भी मौजूद थे. साथ ही बीएसएफ के पूर्व डीआइजी समीर कुमार मित्रा और कलकत्ता व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन भी मौजूद थे. मौके पर कर्नल सौमित्र रॉय ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने बांग्लादेश की आजादी के लिए अपना खून बहाया और अपनी जान तक दी. पड़ोसी देश में जो कुछ हो रहा है, वह अप्रत्याशित है. भारत उचित समय पर सही कदम उठायेगा.

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