खास बातें
Minakshi Mukherjee CPIM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘लाल झंडे’ की साख वापस लौटाने की जिम्मेदारी अब युवाओं के कंधों पर है. इस लड़ाई का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी हैं, मीनाक्षी मुखर्जी. 2021 में नंदीग्राम के तालपाटी खाल के किनारे से ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने वाली मीनाक्षी, अब 2026 के रण में बालीखाल और बागखाल के बीच बसे उत्तरपाड़ा से ताल ठोक रही हैं.
सीपीएम को शून्य से बाहर लाने के मिशन की कमांडर
सीपीएम के लिए यह चुनाव ‘शून्य’ से बाहर आने की जंग है. मीनाक्षी इस मिशन की कमांडर हैं. पार्टी के भीतर उन्हें दिवंगत नेता मानव मुखर्जी (मामू) की विरासत को आगे बढ़ाने वाली ‘मीमू’ (मीनाक्षी मुखर्जी) के नाम से जाना जा रहा है.
अनोखा था पॉली के प्रचार का अंदाज
मीनाक्षी मुखर्जी का असली नाम ‘पॉली’ है. उनका जनसंपर्क करने का अंदाज बेहद निराला रहा. उत्तरपाड़ा में चुनाव प्रचार के दौरान एक ऐसी घटना हुई, जिसने सबको हैरान कर दिया. कोन्नगर में प्रचार के दौरान मीनाक्षी का काफिला एक साड़ी की दुकान के सामने से गुजर रहा था. यह दुकान एक सक्रिय टीएमसी (TMC) कार्यकर्ता की थी. पार्टी कार्यकर्ताओं ने मीनाक्षी को वहां जाने से मना किया, लेकिन वह नहीं मानीं.
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जब टीएमसी कार्यकर्ता ने गिफ्ट की साड़ी
माकपा की उम्मीदवार मीनाक्षी सीधे दुकान के अंदर चली गयीं. दुकानदार से हाथ मिलाया और हंसी-मजाक किया. नतीजा यह हुआ कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उस कार्यकर्ता ने मीनाक्षी को प्यार से एक साड़ी उपहार में दे दी.
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बर्धमान लाइन से अलीमुद्दीन तक, विनय कोनार वाले कमरे में बसेरा
मीनाक्षी का राजनीतिक कद पार्टी में कितनी तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें तमिलनाडु के मदुरै (मीनाक्षी मंदिर का शहर) में हुई पार्टी कांग्रेस में केंद्रीय समिति का सदस्य बनाया गया. राजनीति में आने से पहले मीनाक्षी एक कॉलेज में अस्थायी लैब असिस्टेंट थीं. आज वह अपना पूरा समय पार्टी को देती हैं.
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Minakshi Mukherjee CPIM: दिग्गजों की विरासत
मीनाक्षी ‘बर्धमान लाइन’ की नेता मानी जाती हैं. कोलकाता में सीपीएम के राज्य मुख्यालय (अलीमुद्दीन स्ट्रीट) में वह उसी कमरे में रहती हैं, जो कभी कद्दावर नेता विनय कोनार का आशियाना हुआ करता था. इस चुनाव के दौरान वह कोन्नगर की ‘साधु गली’ में रह रही हैं. यह घर पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री दिवंगत सुदर्शन रायचौधरी का है.
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क्या उत्तरपाड़ा में लहरायेगा ‘लाल झंडा’?
हुगली जिले का यह इलाका अपनी संस्कृति और शिक्षा के लिए जाना जाता है. मीनाक्षी ने यहां अपनी सादगी और धारदार भाषणों से युवाओं को जोड़ने की कोशिश की. पार्टी के पुराने कार्यकर्ता कहते हैं कि जैसे ‘मामू’ (मानव मुखर्जी) ने लोकप्रियता की लहर पैदा की थी, वैसे ही अब ‘मीमू’ (मीनाक्षी) की लहर दिख रही है. देखना यह है कि पॉली की बातों पर भरोसा करके बालीखाल और बागखाल के बीच का यह मतदाता सीपीएम का सूखा खत्म करेगा या नहीं?
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