किसानों की समस्या समाधान के लिए हुई बैठक

इसी समस्या के समाधान और किसानों के हित में अधिशेष फसल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को हुगली के जिलाधिकारी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई.

राज्य सरकार ने दिया हर संभव सहयोग का आश्वासन

हुगली. पश्चिम बंगाल की भूमि अत्यधिक उपजाऊ होने के कारण यहां धान, आलू, मक्का, केला, पपीता और टमाटर सहित कई प्रकार की फसलों का उत्पादन आवश्यकता से कहीं अधिक होता है. लेकिन अधिक उत्पादन के कारण अक्सर किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता और उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है.

इसी समस्या के समाधान और किसानों के हित में अधिशेष फसल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को हुगली के जिलाधिकारी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई.

बैठक में शामिल हुए मंत्री और अधिकारी

बैठक में खाद्य प्रसंस्करण एवं बागवानी मंत्री अरूप राय, कृषि विपणन मंत्री बेचाराम मन्ना, जिलाधिकारी डॉ मुक्ता आर्य, कृषि विपणन विभाग के प्रमुख सचिव ओंकार सिंह मीणा, सांसद मिताली बाग और जिला परिषद सभाधिपति रंजन धारा सहित कई अधिकारी, किसान और कृषि व्यवसायी मौजूद थे.

बैठक का मुख्य उद्देश्य अधिशेष फसलों को कृषि-आधारित उद्योगों में बदलकर किसानों को अधिक लाभ दिलाना था. किसानों से अपील की गयी कि वे केवल उपज बेचकर न रुकें, बल्कि संसाधन कर उद्योग की दिशा में आगे बढ़ें.

प्रसंस्करण इकाइयों से बढ़ेगी आमदनी

कृषि विपणन मंत्री बेचाराम मन्ना ने कहा कि अधिशेष आलू, मक्का और टमाटर से बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग यूनिट खोले जा सकते हैं. इससे आलू से चिप्स, टमाटर से सॉस और केला-पपीता से विभिन्न खाद्य उत्पाद बनाये जा सकते हैं. सरकार प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए अनुदान और सब्सिडी दे रही है.

खाद्य प्रसंस्करण मंत्री अरूप राय ने कहा कि अभी राज्य से अधिशेष मक्का बाहर भेजा जाता है, जिसे अन्य राज्यों में प्रोसेस कर कॉर्नफ्लेक्स के रूप में बंगाल वापस लाया जाता है. यदि यही प्रोसेसिंग राज्य में हो, तो मुनाफा किसानों और स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा.

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार किसानों और कृषि व्यवसायियों के साथ है. अगर सभी मिलकर कृषि-आधारित उद्योगों की दिशा में कदम बढ़ाएं, तो न तो किसानों को नुकसान होगा और न ही अधिशेष फसल बेकार जायेगी.”

आलू बीज उत्पादन पर जोर

प्रमुख सचिव ओंकार सिंह मीणा ने कहा कि बंगाल आलू उत्पादन में अग्रणी है और अब पंजाब पर बीज की निर्भरता समाप्त करनी होगी. राज्य के कृषि वैज्ञानिकों की मदद से उन्नत आलू बीज यहीं तैयार करना संभव है. उन्होंने किसानों से छोटे पैमाने पर चल रहे प्रसंस्करण कार्यों को बड़े स्तर पर करने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि सरकार हर तरह की सहायता देगी.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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