मुख्य बातें
Mangal Pandey: कोलकाता/पटना. पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू किया जाना एक स्वागत योग्य और साहसिक कदम है. राज्य सचिवालय नबान्न भवन में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बीएसएफ अधिकारियों की मौजूदगी में इस प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. मैं इस निर्णय का हृदय से स्वागत करता हूं.
घुसपैठियों से जुड़े अपराधों का दंश झेल रहा बंगाल
बंगाल की 2216 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा दशकों से घुसपैठ, तस्करी, नकली मुद्रा, मानव तस्करी और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों से जुड़े अपराधों का दंश झेल रही है. पिछली सरकारों ने वोटबैंक की राजनीति के चलते सीमा सुरक्षा के इस अहम मुद्दे को जानबूझकर लटकाए रखा. भूमि न देकर बीएसएफ के हाथ बांध दिये गये, जिसका खामियाजा सीमावर्ती जिलों की निर्दाेष जनता को भुगतना पड़ा. श्री पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बिल्कुल सही कहा है कि घुसपैठ और तस्करी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिकी संतुलन और सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला है.
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सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘वन बार्डर वन फोर्स’ की नीति पर काम कर रही है. जब राज्य और केंद्र मिलकर काम करते हैं, तो देश सुरक्षित होता है. पश्चिम बंगाल सरकार का यह कदम ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का उदाहरण है. भारतीय जनता पार्टी का शुरू से मानना रहा है कि सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता. बंगाल की जनता ने बदलाव के लिए जनादेश दिया था और आज वह बदलाव जमीन पर दिख रहा है.
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