खास बातें
Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026: दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 159) सीट को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित किला माना जाता है. 2021 के उपचुनाव में उन्होंने यहां 58,832 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनाव 2026 की दहलीज पर खड़ी ममता बनर्जी के लिए इस बार राह आसान नहीं दिख रही. इसके दो बड़े कारण हैं- मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी कटौती और गुजराती समुदाय की नाराजगी. इन दोनों कारणों से मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है.
मुस्लिम वोट बैंक पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?
भवानीपुर में लगभग 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. ये 2011 से ही टीएमसी का एकमुश्त वोट बैंक रहे हैं. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गये हैं, जिससे टीएमसी की चिंता बढ़ गयी है. कोलकाता की सबर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, भवानीपुर सीट से रिकॉर्ड 40.1 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिये गये हैं. इसके अलावा 22.7 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स को ASDD (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट) श्रेणी में डाल दिया गया है.
Mamata Banerjee Bhabanipur Seat 2026: TMC को सीधा नुकसान
हालांकि, गैर-मुस्लिमों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटाये गये हैं, लेकिन वे विभिन्न पार्टियों (भाजपा, लेफ्ट, टीएमसी) में बंटे हुए हैं. मुस्लिम वोट चूंकि सिर्फ टीएमसी के थे, इसलिए इस कटौती का सीधा और बड़ा झटका ममता बनर्जी को ही लगेगा.
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महुआ मोईत्रा के बयान से ‘गुजराती’ वोट बैंक नाराज
भवानीपुर में लगभग 40 प्रतिशत गैर-बंगाली मतदाता हैं. इनमें गुजराती, मारवाड़ी, सिख और बिहारी शामिल हैं. परंपरागत रूप से भाजपा समर्थक होने के बावजूद यहां के गुजराती और मारवाड़ी समुदाय ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहे हैं. हाल ही में महुआ मोईत्रा के एक बयान ने इस बार खेल बिगाड़ दिया है.
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क्या था महुआ मोईत्रा का विवादित बयान
महुआ मोइत्रा ने आजादी की लड़ाई का जिक्र करते हुए गुजरातियों के योगदान पर सवाल उठाये और सावरकर पर तंज कसा. भाजपा ने इस बयान को ‘गुजराती अस्मिता’ का अपमान बताते हुए इसे घर-घर पहुंचा दिया है. विशेषकर वार्ड नंबर 70 और 72 में, जहां गुजराती आबादी अधिक है, वहां नाराजगी सा देखी जा रही है.
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डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने खुद मांगी माफी
डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने गुजराती समाज से खुद माफी मांगी. उन्होंने महुआ मोईत्रा को फटकार भी लगायी, लेकिन चुनावी जानकारों का कहना है कि यह ‘घाव’ इतनी जल्दी भरने वाला नहीं है.
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रिकॉर्ड जीत बनाम कड़ी चुनौती
ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में 54,213 और पिछले उपचुनाव में करीब 59 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. इस बार एक तरफ उनका सबसे मजबूत वोट बैंक (मुस्लिम) तकनीकी वजहों से कम हो गया है, तो दूसरी तरफ उनकी पुरानी सहयोगी ‘गैर-बंगाली’ जनता अपमान के नाम पर बिदक गयी है. भाजपा अब 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस ‘नाराजगी’ को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.
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