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Left Front : कोलकाता. बंगाल विधानसभा चुनाव इसी साल होने जा रहा है. बंगाल में सत्तासीन तृणमूल को हराने के लिए वाम मोर्चा एक मजबूत विकल्प देने के प्रयास में लगा है. लेकिन वो जितना मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वो उतना ही अलग-थलग होता जा रहा है. हुमांयू कबीर से मोहम्मद सलीम की मुलाकात के बाद वाम मोर्चा की आलोचना हो रही है. वहीं कांग्रेस ने भी घोषणा कर दी है कि वह सीपीएम के साथ गठबंधन में नहीं है. कांग्रेस ने अकेले ही चुनाव में जाने का फैसला किया है. हुमायूं और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने में विफल रहने के बाद, सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम अब दुविधा में फंस गए हैं. वाम मोर्चा को अब एमआईएम प्रमुख असादुदीन ओवैसी से उम्मीद है.
अब एमआईएम के दरवाजे पर सीपीएम
बंगाल में गठबंधन की उम्मीद लेकर सीपीएम अब एमआईएम प्रमुख असादुदीन ओवैसी के दरवाजे पर है. बताया जा रहा है कि सीपीएम का फोन एमआईएम प्रमुखअसादुदीन ओवैसी को गया है. यह संपर्क सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के करीबी व्यक्ति के जरिए किया गया है. एमआईएम के राज्य अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने फोन कॉल आने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि वह सीपीएम नेतृत्व से सीधे बात करना चाहते हैं. एमआईएम पिछले कुछ समय से मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों में अपनी पैठ मजबूत कर रही है. जनता यूनाइटेड पार्टी बनाने के बाद हुमायूं कबीर ने एमआईएम के साथ गठबंधन की बात भी की थी. अब उसी एमआईएम को सीपीएम का फोन आया है. हालांकि, सलीम ने इस फोन कॉल से इनकार किया है. उनका दावा है कि तरह-तरह की ‘बेकार’ बातें उनसे जोड़ी जा रही हैं.
इमरान सोलंकी ने फोन आने की बात स्वीकार की
स्थानीय मीडिया से बात करते हुए इमरान सोलंकी ने इस संबंध में कहा- मुझे एक फोन आया था. मैं उस समय एक बैठक में था. मैं निश्चित रूप से सीपीएम के साथ बैठूंगा. मैं उनसे पूछूंगा कि वे क्या चाहते हैं. कोलकाता या मुर्शिदाबाद जहां चाहेंगे, मैं वहीं बैठूंगा. मैं गठबंधन का प्रस्ताव सुनना चाहूंगा. उन्होंने कहा कि पार्टी के राज्य सचिव से हरी झंडी मिले बिना कोई भी सीपीएम नेता एमआईएम के साथ गठबंधन पर चर्चा करने के लिए फोन नहीं करेगा. वाममार्चा के अंदर भी एक वर्ग का मानना है कि सीपीएम के किसी व्यक्ति ने मोहम्मद सलीम के कहने पर ही फोन किया होगा.. वहीं, वाम मोर्चा के सहयोगी इस बात से नाराज़ हैं कि हुमायूं के बाद सीपीएम फिर से असादुदीन ओवैसी के साथ गठबंधन करने में दिलचस्पी दिखा रही है.
वाम मोर्चा में गठबंधन को लेकर एकमत नहीं
वामपंथी खेमे में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर सीपीएम मुर्शिदाबाद में गठबंधन को लेकर इतना व्याकुल क्यों है. वो कभी कांग्रेस के साथ, तो कभी हुमायूं के साथ गठबंधन की बात करते हैं. अब एमआईएम के साथ चुनावी गठबंधन का प्रयास कर रहे हैं. क्या सलीम यह मान चुके हैं कि वाम मोर्चा अकेले मुर्शिदाबाद विधानसभा सीट नहीं जीत सकती है. वाम मोर्चा के इस व्याकुलता के सवाल पर पत्रकारों से बात करते हुए तृणमूल के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने कहा- सीपीएम एक राजनीतिक साधु बन गई है. उसके हाथ में भीख का कटोरा है और उस कटोरे को घुमाया जा रहा है. मोहम्मद सलीम हुमायूं के मन को समझने गया था. 14 फरवरी आ रहा है, सलीम वैलेंटाइन डे का इस्तेमाल राजनीतिक गठबंधन के लिए कर सकते हैं.
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