पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोलकाता ट्राम का होगा पुनरोद्धार, जानें 153 साल का इतिहास

Kolkata Tram History & Revival: कोलकाता की लाइफलाइन रही ‘ट्राम’ को नया जीवन देने जा रही है बंगाल की भाजपा सरकार. राइट्स (RITES) को सर्वे का जिम्मा मिला है. जानिए, 1873 में घोड़ों से शुरू होकर सितंबर 2024 में बंद होने और अब 2026 में इसके पुनरोद्धार की पूरी कहानी.

Kolkata Tram History & Revival: कोलकाता की सड़कों पर कभी अपनी घंटी की ‘टन-टन’ आवाज से शहर की दूरियां तय करने वाली, प्रेम कहानियों की गवाह और कवियों की यादों में बसने वाली ट्राम एक बार फिर पटरियों पर लौटने को तैयार है. सितंबर 2024 में लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी कोलकाता ट्राम सेवा को लेकर पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने एक फैसला लिया है.

RITES को सर्वे करने का जिम्मा : अर्जुन सिंह

राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह (Arjun Singh) ने घोषणा की है कि सरकार इस पर्यावरण-अनुकूल और ऐतिहासिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पूरी तरह पुनर्जीवित (Revive) करने जा रही है. इसके तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की जांच के लिए राइट्स (RITES) को विस्तृत सर्वे करने का जिम्मा सौंपा गया है.

ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसा होगा नया नेटवर्क

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस मेगा प्लान का उद्देश्य मौजूदा पटरियों का नवीनीकरण करना, ट्राम को एक वैश्विक हेरिटेज इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में संरक्षित करना और इसे पर्यावरण-अनुकूल परिवहन विकल्प के रूप में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाना है. सरकार की योजना है कि इसके तहत जो नये ट्राम के डिब्बे (Carriages) मंगवाये जायेंगे, वे पूरी तरह आधुनिक और ऑस्ट्रेलिया व यूरोप के कुछ प्रमुख शहरों में चलने वाली ट्रामों के मॉडल पर आधारित होंगे.

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Kolkata Tram History: पालकी से ऑटोमोबाइल और घोड़ों से बिजली तक का सफर

जादवपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में बिश्वेंदु घोष द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र ‘फ्रॉम पलकी टू ऑटोमोबाइल : ए ट्रांसपेरेंट रिवोल्यूशन इन कलकत्ता, 1827-1947’ और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, कोलकाता में ट्राम का इतिहास बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरा रहा है.

  • 1873 में घोड़ों से हुई शुरुआत : कलकत्ता (अब कोलकाता) में पहली बार वर्ष 1873 में सियालदह से हुगली नदी के पास अर्मेनियन घाट स्ट्रीट के बीच 3.9 किलोमीटर लंबे रूट पर पहली ट्राम चलायी गयी थी. इसे खींचने के लिए ऑस्ट्रेलिया से विशेष शक्तिशाली घोड़े (Walers) मंगवाये गये थे. हालांकि, भारतीय गर्मियों को न झेल पाने के कारण कई घोड़ों की मौत हो गयी और घाटा होने के कारण इसे नवंबर 1873 में ही बंद करना पड़ा.
  • 1880 में कलकत्ता ट्रामवेज कंपनी (CTC) का जन्म : वर्ष 1880 में लंदन में ‘कलकत्ता ट्रामवेज कंपनी लिमिटेड’ पंजीकृत हुई और कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर दोबारा 8 रूटों पर काम शुरू हुआ. इस बार सेवा को बड़ी व्यावसायिक सफलता मिली.
  • 1882 में भाप के इंजन और यूरोपियनों का विरोध : वर्ष 1882 में ट्राम में भाप (Steam) के इंजनों का इस्तेमाल शुरू हुआ. हालांकि, इसकी भारी आवाज से अन्य बग्घियों के घोड़े बिदक जाते थे और धुआं के कारण गोरे साहबों (White Town) ने इसका कड़ा विरोध किया.
  • 1902 में बिजली से दौड़ी देश की पहली ट्राम : वर्ष 1902 में कोलकाता की ट्राम का पूरी तरह से विद्युतीकरण (Electrification) हुआ, जिसने भारत में आधुनिक शहरी परिवहन की नींव रखी. 1905 तक पूरे शहर को आपस में जोड़ दिया.

नयी सरकार का ‘मेट्रो-ट्राम कनेक्टिविटी’ प्लान

परिवहन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस पुनरोद्धार योजना के तहत केवल हेरिटेज ट्रिप्स ही नहीं चलायी जायेंगी, बल्कि इसे शहर के डेली कम्यूटर्स (रोजाना सफर करने वालों) के लिए मेट्रो लाइनों के साथ भी सिंक (एलाइन) किया जायेगा. इससे कोलकाता को एक ग्रीन ट्रांसपोर्ट लूप मिलेगा, जिससे प्रदूषण कम होगा और यातायात का दबाव भी घटेगा. बंद हो चुकी इस विरासत को दोबारा पटरी पर लाने के फैसले से कोलकाता के नागरिकों और पर्यावरणविदों में भारी उत्साह है.

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By Mithilesh Jha

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