कोलकाता के कुम्हारटोली से न्यूयॉर्क जायेंगी मां दुर्गा, 8 जुलाई को जलमार्ग से होंगी रवाना

Kolkata Kumartuli to New York: कोलकाता की कुम्हारटोली से सात समंदर पार अमेरिका के न्यूयॉर्क जायेगी मां दुर्गा की विशेष प्रतिमा. मूर्तिकार कौशिक घोष द्वारा तैयार की गयी 17 किलो की लाइटवेट मूर्ति 8 जुलाई को जलमार्ग से होगी रवाना.

कोलकाता से विजय बागुई की रिपोर्ट

Kolkata Kumartuli to New York: पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े उत्सव दुर्गा पूजा (Kolkata Durga Puja) में भले ही अभी कुछ महीने बाकी हैं, राज्य की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता के वैश्विक बाजारों में इसकी धमक अभी से सुनाई देने लगी है. विश्वप्रसिद्ध कुम्हारटोली (Kumartuli) की संकरी गलियों में इन दिनों मिट्टी, रंगों और फाइबर की खुशबू के बीच कलाकार दिन-रात विदेशी ऑर्डर्स को पूरा करने में जुटे हैं.

कौशिक घोष ने बनायी है प्रतिमा

इसी कड़ी में कुम्हारटोली के प्रख्यात मूर्तिकार कौशिक घोष (Kaushik Ghosh) द्वारा तैयार की गयी मां दुर्गा की एक बेहद खास और अनूठी प्रतिमा अब सात समंदर पार अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थापित होने जा रही है. यह विशेष प्रतिमा 8 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से जलमार्ग से न्यूयॉर्क रवाना कर दी जायेगी.

5 फीट की प्रतिमा का वजन 17 किलो

लंबे समुद्री सफर और विदेशी दुर्गा पूजा समितियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस प्रतिमा को बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है.

  • करीब 5 फीट ऊंची इस भव्य प्रतिमा को पारंपरिक गंगा की मिट्टी की बजाय फायर-प्रूफ और शॉक-प्रूफ फाइबर से तैयार किया गया है.
  • फाइबर की वजह से पूरी प्रतिमा का कुल वजन 17 किलोग्राम है. इससे लंबी समुद्री यात्रा के दौरान प्रतिमा के टूटने-चटकने का खतरा शून्य हो जाता है. इसे विदेशों में कई सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
  • मूर्तिकार कौशिक घोष ने बताया कि न्यूयॉर्क की पूजा समिति से उन्हें 2 महीने पहले ऑर्डर मिला था. उनकी टीम ने डेढ़ महीने की नक्काशी के बाद मां दुर्गा के चेहरे के सौम्य भाव, महिषासुर मर्दिनी रूप, सिंह, अस्त्र-शस्त्र और मुकुट को विशुद्ध बंगाली राजबाड़ी शैली में ढाला है.

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कुम्हारटोली का 300 साल पुराना हुनर वैश्विक मंच पर

यह कोई पहली बार नहीं है, जब कुम्हारटोली की कला विदेश जा रही हो. आज अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, सिंगापुर, जापान और खाड़ी देशों (UAE) में रहने वाला प्रवासी भारतीय व बंगाली समुदाय मां दुर्गा की मूर्तियों के लिए केवल कोलकाता पर ही भरोसा करता है.

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विदेशी ऑर्डर में आया उछाल

300 साल पुराने इतिहास को समेटे कुम्हारटोली के कलाकारों ने समय के साथ आधुनिक तकनीक (जैसे फाइबर मोल्डिंग) को तो अपनाया है, लेकिन अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक शैली की आत्मा को मरने नहीं दिया. यही वजह है कि जबसे यूनेस्को (UNESCO) ने कोलकाता की दुर्गा पूजा को ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सूची में शामिल किया है, तब से विदेशी ऑर्डर्स में उछाल आया है.

समुद्री थपेड़ों से बचाने के लिए ‘स्पेशल थ्री-लेयर’ पैकिंग

चूंकि समुद्री मार्ग से न्यूयॉर्क पहुंचने में कई हफ्तों का समय लगता है, इसलिए इस 17 किलो की फाइबर प्रतिमा को अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट और सख्त कस्टम नियमों के तहत पैक किया जा रहा है. प्रतिमा को मौसम की नमी और जहाजों के झटकों से सुरक्षित रखने के लिए वाटरप्रूफ मैटेरियल के बाद मजबूत लकड़ी के विशेष बक्सों में सील किया जा रहा है. 8 जुलाई को जब यह प्रतिमा महासागर पार करने निकलेगी, तो इसके साथ केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि बंगाल की समृद्ध कला, अटूट आस्था और कुम्हारटोली के शिल्पकारों का पसीना भी न्यूयॉर्क की धरती पर कदम रखेगा.

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By Mithilesh Jha

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