कोलकाता में बड़े पेड़ों के लिए जगह नहीं, केएमसी लगा रहा छोटे आकार के पेड़

महानगर में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी ने लोगों की हालत खराब कर दी है.

कोलकाता. महानगर में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी ने लोगों की हालत खराब कर दी है. इस गर्मी और वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए कोलकाता नगर निगम (केएमसी) महानगर की प्रमुख सड़कों पर ””””ग्रीन बफर जोन”””” तैयार कर रहा है. हालांकि, महानगर में अब बड़े पेड़ लगाने की जगह नहीं बची है. साथ ही, आंधी-तूफान के दौरान बड़े पेड़ों के गिरने का खतरा भी बढ़ गया है. इन्हीं कारणों से निगम अब चार से 4.5 फीट ऊंचाई वाले छोटे आकार के पेड़ लगा रहा है. अधिकारियों का दावा है कि ये पेड़ न सिर्फ ऑक्सीजन ज्यादा देते हैं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी कारगर हैं. नगर निगम के पार्क एंड स्क्वायर विभाग के एक अधिकारी ने बताया : कोलकाता में बड़े पेड़ लगाने की जगह लगातार घट रही है. मैदान इलाके में पहले ही वन विभाग की मदद से पाकुर, शिरीष और बरगद जैसे बड़े पेड़ लगाये जा चुके हैं, जिनकी औसत उम्र अब 30-35 साल हो चुकी है. पूर्व कोलकाता के बाइपास क्षेत्र में भी कुछ पेड़ लगाये गये हैं और इस साल निगम वहां करीब 1,000 से 1,500 पेड़ लगाने की योजना बना रहा है. निगम के बागवानी विभाग के अनुसार, पहले सेंट्रल एवेन्यू और भूपेन बोस एवेन्यू में बड़े पेड़ लगाने की कोशिश की गयी थी, लेकिन बारिश और आंधी के कारण उनमें से अधिकतर गिर गये. एक रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी कि कोलकाता की मिट्टी नरम होने के कारण बरगद और आम जैसे बड़े पेड़ तूफानों में उखड़ जाते हैं. अधिकारी का दावा है कि पिछले दो से ती वर्षों के भीतर कोलकाता में औसतन 50,000 पेड़ लगाये गये थे. पिछले पांच वर्षों में गार्डेनरीच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और टाला पंपिंग स्टेशन के पास आम, जामुन, कटहल और नींबू के पेड़ लगाये गये थे. लेकिन देखरेख के बावजूद इनमें से कई पेड़ सूख गये हैं. नगर निगम अब सड़कों के बीच छोटे आकार के पेड़ लगाने पर जोर दे रहा है. अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है और इसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिल रहे हैं. प्रदूषण में कमी और हवा में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि इसका प्रमाण है. गौरतलब है कि हर साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पूरे राज्य में पौधारोपण अभियान शुरू किया जाता है. इसी दिन से कोलकाता में भी छोटे पेड़ों के पौधे लगाये जायेंगे.

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Published by: Sandip tiwari

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