आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एफआरआरओ) के समक्ष पेश किया जायेगा
संवाददाता, कोलकातामंगलवार को कर्नाटक पुलिस 17 लोगों को लेकर हावड़ा पहुंची. पकड़े गये लोगों पर बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह हैं. हिरासत में लिये गये 17 लोगों में दो वर्ष के बच्चे से लेकर 75 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं. पकड़े गये संदेहास्पद 17 बांग्लादेशी नागरिकों में तीन बच्चे, सात महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं. मंगलवार शाम पांच बजे कर्नाटक पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में 12 लोगों की हथियारबंद टीम 12246 बेंगलुरु-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस से हावड़ा स्टेशन न्यू कांप्लेक्स पहुंची. हावड़ा स्टेशन के न्यू कांप्लेक्स के 23 नंबर प्लेटफॉर्म पर शाम 5.15 बजे पहुंची ट्रेन की एस थ्री बोगी में कर्नाटक पुलिस के सिपाही और अधिकारी उतरे. उनके साथ सभी संदेहास्पद बांग्लादेशी नागरिक थे. बांग्लादेशी नागरिकों के प्लेटफॉर्म पर उतरते ही कर्नाटक पुलिस ने उन्हें घेर लिया और इस्कॉर्ट कर हावड़ा स्टेशन के बाहर ले गये. इस दौरान कर्नाटक पुलिस ने हावड़ा जीआरपी के अधिकारियों के साथ मिलकर जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की. वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एफआरआरओ ) के समक्ष पेश किया जायेगा. बांग्लादेशी सिद्ध होने पर उन्हें बांग्लादेश भेजा दिया जायेगा.टीम का नेतृत्व कर रहे कर्नाटक पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी ने बताया कि सर्च ऑपरेशन चलाकर आरोपियों को बेंगलुरु शहर में विभिन्न इलाकों के पकड़ा गया है. पकड़े गये लोग शहर में कबाड़ चुनने के काम करते थे. ये विभिन्न बस्तियों में वर्षों से रह रहे थे. हालांकि पिछले सप्ताह इन बांग्लादेशियों के बारे में जानकारी मिली और पुलिस ने अभियान चलाकर सभी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के पास से मिले दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के आधार पर ऐसे सबूत मिले हैं जिससे लगता है कि ये सभी बांग्लादेश के रहने वाले हैं. ये सभी बेंगलुरु शहर में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे थे. आरोपी पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में आये और बेंगलुरु में बसने से पहले दूसरे शहरों में गये. वे स्क्रैप डीलर, कंस्ट्रक्शन वर्कर और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं.
एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के पास से कई नकली दस्तावेज भी बरामद किये गये जिससे वह अपनी असली पहचान छिपाकर भारत में नागरिक के तौर पर बेंगलुरु में रह रहे थे.