मुख्य बातें
Jyotipriya Mallik: कोलकाता. ममता बनर्जी एक बार फिर अकेली पड़ गई हैं. इस बार उनके चहेते ‘बालू दा’ ने ममता दीदी का हाथ छोड़ दिया है. ज्योतिप्रिया मल्लिक ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. पूर्व मंत्री ने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस्तीफे पत्र में हालांकि ज्योतिप्रिया मल्लिक ने अपनी अस्वस्थता का हवाला दिया है, लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं.
कार्यकारी समिति में थे शामिल
हाल ही में ज्योतिप्रिया को तृणमूल कांग्रेस की कार्यकारी समिति में शामिल किया गया था. हालांकि, वे अस्वस्थता के कारण जिम्मेदारी संभालने में असमर्थ हैं. पत्र में ज्योतिप्रिया मल्लिक ने यही बात कही है. ज्योतिप्रिया मल्लिक ने पत्र में लिखा है कि उनका ब्लड शुगर लेवल 350 तक पहुंच गया है. वे किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. इस स्थिति में उनके लिए पार्टी के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना अब संभव नहीं है.
ममता के सबसे करीबी लोगों में से एक
ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में ज्योतिप्रिया मल्लिक का नाम सबसे आगे है. तृणमूल की शुरुआत से ही, वे ममता के संघर्ष के दिनों में पार्टी के सिपाही के रूप में उनके साथ खड़े रहे. ममता ने बालू दा का साथ उनके बुरे दिनों में भी नहीं छोड़ा. राशन भ्रष्टाचार मामले में ज्योतिप्रिया के जेल जाने के बाद भी तृणमूल नेता ने उन पर भरोसा किया. उन्होंने यह भी खुलकर दावा किया कि ज्योतिप्रिया को फंसाया गया था, लेकिन, पार्टी के बुरे दिनों में, ममता के बुरे दिनों में, बालू उनका साथ नहीं दे पाए.
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राशन भ्रष्टाचार मामले में हैं आरोपित
राशन भ्रष्टाचार मामले में जेल जाने के बावजूद ममता बनर्जी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार क्यों बनाया, इस पर भी काफी आलोचना हुई. इसी बीच, कुछ दिन पहले ज्योतिप्रिया को तृणमूल कांग्रेस की कार्यकारी समिति का सदस्य बनाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति बदल गई. हालांकि उन्होंने शारीरिक बीमारी का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, लेकिन राजनीतिक हलकों के अनुसार, उन्होंने पार्टी की विफलता के कारण बाकी नेताओं की तरह ही इस्तीफा दिया.
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