अवमानना मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ज्वाइंट एंट्रेस बोर्ड

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के फैसले पर स्थगनादेश जारी किया था, जिसके बाद संयुक्त प्रवेश परीक्षा के परिणाम प्रकाशित किये गये थे.

हाइकोर्ट के इस आदेश के ठीक बाद ओबीसी प्रमाणपत्रों की अधिसूचना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया गया

संवाददाता, कोलकाता

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के फैसले पर स्थगनादेश जारी किया था, जिसके बाद संयुक्त प्रवेश परीक्षा के परिणाम प्रकाशित किये गये थे. पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा बोर्ड ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कौशिक चंद की पीठ के समक्ष लंबित न्यायालय की अवमानना के मामले के खिलाफ फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. ओबीसी आरक्षण संबंधी जटिलताओं के कारण संयुक्त प्रवेश परीक्षा के परिणामों के प्रकाशन में काफी देरी हुई थी. हाइकोर्ट ने कहा था कि परिणाम 2010 से पहले की ओबीसी सूची के अनुसार प्रकाशित किया जा सकता है. हाइकोर्ट के इस आदेश के ठीक बाद ओबीसी प्रमाणपत्रों की अधिसूचना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया गया. वहां, हाइकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सवालों का सामना करना पड़ा. हाइकोर्ट के आदेश पर एक अंतरिम स्थगनादेश जारी किया गया. इसके बाद हाइकोर्ट ने संयुक्त बोर्ड से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम स्थगनादेश जारी करने से पहले बोर्ड ने हाइकोर्ट के आदेश को लागू क्यों नहीं किया? हाइकोर्ट ने कहा कि 2024 में ओबीसी मामले में उनके द्वारा दिये गये फैसले का उल्लंघन किया गया है. हाइकोर्ट ने कहा कि अदालत के आदेश की अवहेलना की गयी है. इसके बाद राज्य संयुक्त बोर्ड ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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