15 अगस्त को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. पश्चिम बंगाल को क्रांतिकारियों की भूमि कहा जाता है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मातंगिनी हाजरा समेत न जाने कितने आंदोलनकारियों ने जंग-ए-आजादी में अपनी आहुति दी. लेकिन, क्या आपको पता है कि पश्चिम बंगाल के कितने स्वतंत्रता सेनानी हुए, जिन्होंने जेल की यातनाएं सहीं? देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से जंग लड़ने वालों की सटीक संख्या तो आज तक जारी नहीं हुई, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के दौरान सबसे कठिन यातना सहने वालों में सबसे ज्यादा आंदोलनकारी पश्चिम बंगाल से थे.
राज्यसभा के दस्तावेज में 9 राज्यों के नाम
पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थकों फेसबुक पेज ‘ममता बनर्जी सपोर्टर्स’ पर राज्यसभा का एक दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. इसमें बताया गया है कि अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल में सबसे ज्यादा बंगाल के वीर सपूतों को बंद किया गया था. एक पेज के इस दस्तावेज में बाकायदा उन 9 राज्यों के नाम हैं, जहां के स्वतंत्रता सेनानियों को अंडमान-निकोबार के जेल में रखा गया था.
बंगाल के 395 स्वतंत्रता सेनानी थे अंडमान जेल में
इस सूची में पंजाब, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल, आंध्रप्रदेश, ओडिशा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश/ नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर/ तमिलनाडु के आंदोलनकारी शामिल थे. इस लिस्ट के मुताबिक, अंग्रेजी हुकूमत ने 585 स्वतंत्रता सेनानियों को अंडमान निकोबार के जेल में यातनाएं दीं थीं. इसमें सबसे ज्यादा 395 आजादी के मतवाले (कुल का लगभग 67.5 प्रतिशत) पश्चिम बंगाल से थे.
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कालापानी की सजा काटने वालों में दूसरे नंबर पर पंजाब के क्रांतिकारी
पंजाब के 95, उत्तर प्रदेश के 18, बिहार के 17, केरल के 14, आंध्रप्रदेश के 8, ओडिशा के 5, महाराष्ट्र के 3 और हिमाचल प्रदेश/ नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर/ तमिलनाडु एवं कुछ अन्य राज्यों के कुल 27 लोगों ने सेलुलर जेल में सजा काटी थी. भारत सरकार ने राज्यसभा में 9 जुलाई 2019 को एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में यह लिखित उत्तर दिया था. इसमें उन राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या बतायी गयी थी, जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने अंडमान के सेलुलर जेल भेजा था. इस सूची में उन क्रांतिकारियों के नाम नहीं हैं, जिनको कालापानी की सजा मिली थी.
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क्यों दी जाती थी अंडमान की सजा?
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र क्रांति करने वाले, ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला करने वाले और अनुशीलन समिति व युगांतर जैसे क्रांतिकारी संगठनों से जुड़े सेनानियों को मुख्य भूमि से हजारों किलोमीटर दूर कालापानी भेज दिया जाता था, ताकि वे देश के अन्य हिस्सों में क्रांति की ज्वाला न भड़का सकें. वहां उनसे कोल्हू से तेल निकलवाये जाते थे, उनसे पत्थर तुड़वाये जाते थे. यहां बंद सेनानियों को अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं.
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