I-PAC के विनेश चंदेल 10 दिन की ED रिमांड में, 50 करोड़ के ‘हवाला’ और सबूत मिटाने का आरोप, देखें Video

I-PAC Director Vinesh Chandel ED Custody: दिल्ली की अदालत ने आई-पैक सह-संस्थापक विनेश चंदेल को कोयला घोटाले और हवाला लेन-देन मामले में 10 दिन की ईडी हिरासत में भेजा. सबूत मिटाने और सबूतों से छेड़छाड़ के लगे आरोप. पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट.

I-PAC Director Vinesh Chandel ED Custody: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक पहले केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. दिल्ली की एक अदालत ने राजनीतिक परामर्शदाता संस्था आई-पैक (I-PAC) के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को मंगलवार को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया.

चंदेल की गिरफ्तारी से खड़ा हुआ नया विवाद

चंदेल पर राजनीतिक दलों से प्राप्त धन के कथित हवाला लेनदेन और खातों में हेराफेरी के गंभीर आरोप हैं. ईडी का दावा है कि आई-पैक करीब 50 करोड़ रुपए के धनशोधन (मनी लाउंडरिंग) में शामिल है. इस गिरफ्तारी ने चुनावी रणनीतियों के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है.

आधी रात को जज के आवास पर हुई पेशी

सोमवार शाम करीब पौने आठ बजे गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच सोमवार रात करीब 11:55 बजे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के आवास पर पेश किया गया. अदालत ने दलीलें सुनने के बाद मंगलवार तड़के साढ़े तीन बजे उन्हें 10 दिन की रिमांड पर भेजने का आदेश दिया. 24 अप्रैल तक चंदेल से ईडी मुख्यालय में सघन पूछताछ की जायेगी.

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क्या हैं ईडी के गंभीर आरोप?

ईडी ने विनेश चंदेल और आई-पैक के खिलाफ कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं.

  • खातों में हेराफेरी : ईडी का आरोप है कि आई-पैक ने प्राप्त धन को जान-बूझकर बैंकिंग माध्यमों (White) और नकद (Black) में बांटने का तरीका अपनाया, ताकि वित्तीय लेन-देन की वास्तविक सीमा को छिपाया जा सके.
  • हवाला और चुनावी खर्च : एजेंसी के मुताबिक, अवैध धन को वैध दिखाने के लिए हवाला माध्यमों का उपयोग किया गया और इस पैसे का इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने और चुनावी खर्चों में किया गया.
  • सबूत नष्ट करने का प्रयास : अदालत के आदेश में उल्लेख है कि 8 जनवरी को कोलकाता छापेमारी के बाद चंदेल ने कर्मचारियों को ई-मेल और संवेदनशील डेटा ‘डिलीट’ करने का निर्देश दिया था, ताकि जांच में बाधा डाली जा सके.

कोयला घोटाले और ‘आप’ कनेक्शन से जुड़े तार

यह मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. इसके तार बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले से भी जुड़े बताये जा रहे हैं. जांच के सिलसिले में 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु (ऋषि राज सिंह के ठिकाने) और मुंबई में ‘आप’ के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के परिसर पर भी छापेमारी हो चुकी है. एनएलआईयू (NLIU) से विधि स्नातक चंदेल की आई-पैक में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वे कंपनी के मुख्य रणनीतिकार माने जाते हैं.

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अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी ने किया कड़ा विरोध

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इसे चुनावी माहौल पर प्रहार बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव से महज 10 दिन पहले ऐसी कार्रवाई निष्पक्षता पर सवाल उठाती है. इससे पहले 8 जनवरी को कोलकाता में हुई ईडी की छापेमारी के बीच बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गयीं थीं. ईडी ने उन पर ‘काम में बाधा’ डालने और जबरन सबूत ले जाने के आरोप लगाये थे.

I-PAC Director Vinesh Chandel ED Custody: वकीलों की दलील- राजनीति से प्रेरित है कार्रवाई

चंदेल के वकील विकास पहवा ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को ईसीआईआर (ECIR) की कोई जानकारी नहीं दी गयी. उन्होंने इसे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनावों के मद्देनजर पूरी तरह ‘राजनीति से प्रेरित’ कार्रवाई करार दिया. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान है. ऐसे में विनेश चंदेल की 10 दिनों की रिमांड आई-पैक के चुनावी मैनेजमेंट और उससे जुड़े दलों (TMC और DMK) के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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