अब राज्य के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का टीका लगाया जायेगा.
By AKHILESH KUMAR SINGH | Updated at :
संवाददाता, कोलकाता
कैंसर के प्रसार को रोकने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने विशेष पहल की है. केंद्रीय योजना यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआइपी) के तहत अब राज्य के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में भी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का टीका लगाया जायेगा. यह टीकाकरण पूरी तरह नि:शुल्क होगा. निजी मेडिकल कॉलेजों में वैक्सीनेशन के लिए तैयार किये गये विशेष स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा. स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों को इस संबंध में निर्देश भेज दिये हैं. वहीं राज्य के सरकारी अस्पतालों में भी इस टीकाकरण की तैयारी शुरू कर दी गयी है. हेल्थ वर्कर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वैक्सीनेशन शुरू किया जायेगा. सरकारी अस्पतालों के लिए वैक्सीनेशन गाइडलाइंस कुछ समय पहले आधिकारिक रूप से जारी की जा चुकी हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अभियान को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को करीब तीन लाख वैक्सीन वायल भेजे हैं.
इस उम्र की लड़कियों को लगेगा टीका :
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव में मदद करती है. यह वायरस सर्वाइकल, एनल, गले और जननांगों से जुड़े कैंसर तथा मस्सों का कारण बन सकता है. आमतौर पर नौ से 14 वर्ष की लड़कियों को इस वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं, जबकि 15 से 45 वर्ष की महिलाओं को तीन डोज लगायी जाती हैं. केंद्र सरकार की मदद से राज्य सरकारों को कक्षा पांचवीं से नौवीं तक की छात्राओं को यह वैक्सीन मुफ्त देने का निर्देश दिया गया है, ताकि इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके. स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी ने बताया कि यह पहल सरकारी वैक्सीनेशन सेवाओं का दायरा बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गयी है. साथ ही सेवा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाये रखने के लिए पूरे कार्यक्रम को नियंत्रित तरीके से लागू किया जा रहा है.
सप्ताह में दो दिन से अधिक नहीं होंगे सेशन :
नयी गाइडलाइंस के अनुसार निजी संस्थानों में सप्ताह में अधिकतम दो दिन ही वैक्सीनेशन सेशन आयोजित किये जा सकेंगे. इसके लिए बुधवार और गुरुवार को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है. हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी से सलाह लेकर ही किया जायेगा. निजी मेडिकल कॉलेजों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा, जो जिला प्रशासन के साथ समन्वय रखते हुए वैक्सीन के संग्रहण और टीकाकरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा.
वैक्सीनेशन के बाद स्वास्थ्य समस्या पर तत्काल इलाज
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि वैक्सीनेशन के बाद यदि किसी भी प्रकार की अनचाही घटना होती है या कोई लड़की अस्वस्थ महसूस करती है, तो उसे संबंधित अस्पताल में तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाये. इसके लिए निजी अस्पतालों को इमरजेंसी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है.