कोलकाता. झालदा नगरपालिका को जारी किये गये शो-कॉज नोटिस के मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट ने पुरुलिया जिले के जिलाधिकारी (डीएम) को जांच की अनुमति दे दी है. हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय की अनुमति के बिना इस संबंध में कोई अंतिम या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी. बुधवार को हाइकोर्ट की शीतकालीन अवकाशकालीन पीठ में न्यायमूर्ति विश्वरूप चौधुरी की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई. अदालत ने आठ सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई तय करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस अवधि के भीतर हलफनामा दायर कर कथित मास पिटीशन से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करे. उल्लेखनीय है कि राज्य के नगर विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग ने विभिन्न शिकायतों के आधार पर झालदा नगरपालिका के नगर अध्यक्ष को शो-कॉज नोटिस जारी किया था. इसी नोटिस को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी.
नोटिस का आधार कथित मास पिटीशन है, जिसमें बुनियादी नगरपालिका सेवाएं, विशेषकर पेयजल आपूर्ति न होने का आरोप लगाया गया है. वहीं, झालदा नगरपालिका की से पेश वकील ने दलील दी कि अब तक उन्हें कोई मास पिटीशन प्राप्त नहीं हुई है. राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि वेस्ट बंगाल म्यूनिसिपल एक्ट के तहत उसे इस प्रकार का शो-कॉज नोटिस जारी करने का अधिकार है और इस प्रारंभिक चरण में अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है. राज्य का यह भी तर्क था कि जिलाधिकारी इस मामले में एक रिपोर्ट देना चाहते हैं और इसके लिए समय दिया जाना चाहिए, क्योंकि फिलहाल कोई तात्कालिक आपात स्थिति नहीं है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
