हैंगमैन फ्रैक्चर पीड़ित महिला की चिकित्सकों ने बचायी जान, गले की हुई जटिल सर्जरी

इस दुर्घटना में उसके गले और चेहरे की कई हड्डियां टूट गयी थीं.

शिव कुमार राउत, कोलकाता

दक्षिण कोलकाता के ढाकुरिया स्थित एक निजी अस्पताल में 56 साल की एक महिला की जान बचायी गयी, जो हैंगमैन फ्रैक्चर से पीड़ित थी. महिला के गले में गंभीर चोटें उस समय आयीं, जब टोटो के पिछले पहिये में उसका दुपट्टा फंस गया और वह सड़क पर गिर गयी. इस दुर्घटना में उसके गले और चेहरे की कई हड्डियां टूट गयी थीं. महिला को ढाकुरिया के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे जटिल न्यूरो सर्जरी कर बचाया गया. चिकित्सकों के अनुसार, गले की चोट के कारण गर्दन की ऊपरी रीढ़ की हड्डी में टाइप 2 ओडोंटॉइड फ्रैक्चर हुआ था, जो रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था. इस तरह के फ्रैक्चर में मृत्यु दर अत्यधिक होती है और अचानक लकवा या कार्डियक अरेस्ट जैसी जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं.

टूटी हड्डियों को स्क्रू से जोड़ा गया

न्यूरो सर्जन डॉ निरूप दत्ता और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ प्रखर ज्ञानेश की टीम ने महिला की जान बचाने के लिए इमरजेंसी स्टेबिलाइजेशन सर्जरी की. एक्स-रे और सीटी स्कैन में फ्रैक्चर की गंभीरता स्पष्ट हुई थी. गर्दन की ऊपरी दो कशेरुकाओं (सी1 और सी2) में दो फ्रैक्चर थे, जिनके हिलने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और तुरंत मौत का खतरा था.टीम ने कोटिल प्रोसीजर नामक विशेष तकनीक का उपयोग किया. इसमें सी1 और सी2 कशेरुकाओं के दोनों तरफ ट्रांसआर्टिकुलर स्क्रू और पोस्टिरियर ओडोंटॉइड स्क्रू फिक्सेशन लगाया गया.

यह तकनीक गर्दन की नाजुक हड्डियों को मजबूती देती है. डॉक्टरों के अनुसार, दुनिया भर में इस तकनीक का इस्तेमाल केवल कुछ ही सेंटर में होता है और मेडिकल लिटरेचर में अब तक केवल 15 मामले रिपोर्ट किये गये हैं. डॉ दत्ता ने बताया कि हैंगमैन फ्रैक्चर के मामलों में तुरंत मौत हो सकती है, लेकिन यह दुर्लभ था कि मरीज सर्जरी तक जिंदा थी. सर्जरी जटिल थी, लेकिन चिकित्सकों की टीम सफल रही और महिला की जान बच गयी.

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By GANESH MAHTO

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