आनंदपुर अग्निकांड में गोदाम मालिक को नरेंद्रपुर पुलिस ने लिया हिरासत में

महानगर से सटे आनंदपुर में हुए भीषण अग्निकांड के करीब 40 घंटे बाद पुलिस ने डेकोरेटर कंपनी के गोदाम मालिक गंगाधर दास को हिरासत में लिया.

संवाददाता, कोलकातामहानगर से सटे आनंदपुर में हुए भीषण अग्निकांड के करीब 40 घंटे बाद पुलिस ने डेकोरेटर कंपनी के गोदाम मालिक गंगाधर दास को हिरासत में लिया. मंगलवार को बारुईपुर स्थित उसके आवास से बाहर निकलते समय नरेंद्रपुर थाने की पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और फिलहाल बारुईपुर जिला पुलिस कार्यालय में लगातार पूछताछ की जा रही है.इस अग्निकांड में अब तक आठ लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 25 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं. प्रशासन और पुलिस की टीमें मलबे की तलाशी और पहचान की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं.

गोदाम मालिक गंगाधर दास ने प्रारंभ में पूरी जिम्मेदारी मोमो कंपनी पर डालने की कोशिश की. उसका दावा है कि जमीन और गोदाम उनके स्वामित्व में हैं, लेकिन मोमो कंपनी ने इसे लीज पर लिया था, और वहां काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा कंपनी की जिम्मेदारी थी. हालांकि, पुलिस जांच में पता चला है कि दोनों गोदामों में कोई अग्निनिरोधक व्यवस्था मौजूद नहीं थी. न तो फायर एक्सटिंग्विशर थे और न ही कोई वैकल्पिक आपातकालीन मार्ग. इसके अलावा गोदामों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी, जिससे आग तेजी से फैल गयी और मजदूरों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया.

सूत्रों के मुताबिक, जिस फैक्टरी और गोदाम में हादसा हुआ, वहां मजदूरों को काम के साथ-साथ ठहराया भी जाता था. एक ही प्रवेश और निकास द्वार होने के कारण आग लगते ही रास्ता बंद हो गया और कई मजदूर और सुरक्षा कर्मी भीतर फंस गये. इस घटना के बाद औद्योगिक सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. विपक्षी दल इसे प्रशासन की विफलता बता रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का दावा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

लापता मजदूरों के परिवारों में मातम

लापता मजदूरों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है. कई परिवारों ने नरेंद्रपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करायी है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि डीएनए जांच और फॉरेंसिक प्रक्रियाओं के जरिये मृतकों और लापता लोगों की पहचान की जायेगी. आनंदपुर अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि महानगर और उससे सटे इलाकों में चल रहे गोदामों और कारखानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी आखिर कब तक लोगों की जान लेती रहेगी.

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