कोलकाता से शिव कुमार राउत की रिपोर्ट
राज्य में फर्जी एमबीबीएस प्रमाणपत्र के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने वाले पांच लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. बिहार मेडिकल काउंसिल से दस्तावेजों के फर्जी होने की पुष्टि के बाद पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने पांचों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया. आरोप है कि इन सभी ने फर्जी एमबीबीएस प्रमाणपत्र के आधार पर पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण हासिल किया था.
शिकायत के बाद शुरू हुई दस्तावेजों की जांच
मामले में शिकायत मिलने के बाद पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने बिहार मेडिकल काउंसिल से संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की जानकारी मांगी थी. जवाब में बिहार मेडिकल काउंसिल ने पांचों के एमबीबीएस दस्तावेजों को फर्जी बताया. इसके बाद पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने कार्रवाई करते हुए सभी पांचों का मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया.
जिनका रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द
- पाथरप्रतिमा के शेख यूनुस हसन,
- कुलतली के उत्तम माइति,
- पाथरप्रतिमा के हाफिजुल हाल्दार,
- गायघाटा के जुल्फिकार मंडल,
- बर्धमान के सईदुल हक
2007 से 2022 के बीच कराया था रजिस्ट्रेशन
जांच में सामने आया कि पांचों ने अलग-अलग वर्षों में मेडिकल रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें किसी ने 2007, किसी ने 2008, जबकि अन्य ने 2017, 2018 और 2022 में पंजीकरण कराया था. इसका मतलब है कि कुछ लोग लंबे समय तक डॉक्टर के रूप में चिकित्सा सेवा देते रहे वे निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी काम करते रहे होने की बात सामने आयी है.
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निजी अस्पतालों और चिकित्सकों की शिकायत पर कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और कुछ चिकित्सकों की ओर से शिकायत की गयी थी. इसके आधार पर दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ायी गयी. बिहार मेडिकल काउंसिल से प्रमाणपत्रों के फर्जी होने की पुष्टि के बाद पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने पांचों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया.
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