मुख्य बातें
Election Commission Meeting:कोलकाता. बंगाल में विधानसभा चुनाव को ले कर चुनाव आयोग की आज विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उन्हें बैठक में बुलाया तो जरूर, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया. तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक के बाद रवाना हो गया.
आयोग के व्यवहार से नाराज दिखी चंद्रिमा भट्टाचार्य
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आयोग के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है. उनका दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें बोलने से मना किया है. चंद्रिमा उनके इस व्यवहार से नाखुश दिखी. चंद्रिमा ने कहा- मैं एक महिला हूं और वे मुझे बोलने से मना करते रहे. वास्तव में उन्हें महिलाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है. इसीलिए वे महिलाओं के नाम भी काट रहे हैं. अगर मेरा नाम सूची में नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी जिम्मेदारी है. मुझे लाइन में क्यों खड़ा होना पड़ता है. महिलाओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है.
क्या सुप्रीम कोर्ट जाना गलत था
तृणमूल ने एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है. आयोग के साथ हुई बैठक में यह मुद्दा उठा. चंद्रिमा ने कहा- मैं एसआईआर के बारे में कुछ भी कहूँ, वे कहते हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तो फिर उन्होंने हमें क्यों बुलाया. जब उन्होंने हमें बुलाया था, तो हमें उनकी बात सुननी चाहिए थी. क्या सुप्रीम कोर्ट जाना गलत था. हमने काफी कुछ किया है और सुप्रीम कोर्ट गए हैं. क्यों न जाएँ, जनता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है.
कितने फेज में हो चुनाव पर चुप रही तृणमूल
चुनाव कितने चरण में हो इस सवाल का जवाब देने से तृणमूल नेताओं ने परहेज किया. उन्होंने कहा- यह मतदान के दौरों पर चर्चा करने का स्थान नहीं है. तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिरहाद हकीम ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा-भाजपा के पैर तले ज़मीन नहीं है. वे राज्य को बर्बाद कर रहे हैं. उन्होंने निर्दोष लोगों को SIR की कतार में खड़ा कर दिया है. उनकी वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है.
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बंगाल को भाजपा की नजर से देखता है आयोग
तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल फिरहाद हकीम ने कहा- भाजपा ने यह धारणा बना रखी है कि बंगाल रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का अड्डा है. इसी के अनुरूप आयोग ने नीति बनाई है, लेकिन दो महीने की इस प्रक्रिया में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला. इसके बजाय, आपने भारतीय नागरिकों को परेशान किया है. सैकड़ों मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है. इतने सारे लोग अपनी नौकरी छोड़कर कतारों में खड़े हैं, सिर्फ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए. यह आयोग की गलती है.
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