कोलकाता से अमित शर्मा की रिपोर्ट
अवैध कोयला खनन व तस्करी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल और झारखंड में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की. जांच एजेंसी की टीमों ने कोलकाता, उत्तर 24 परगना, आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज और धनबाद समेत विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की. इडी की यह कार्रवाई मामले में अब तक की सबसे बड़ी जांच कवायदों में से एक मानी जा रही है.
25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, अवैध कोयला कारोबार, तस्करी और उससे जुड़े कथित काले धन के नेटवर्क की जांच के तहत इडी ने 25 से अधिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. राज्य में दक्षिण कोलकाता, सॉल्टलेक, आसनसोल, दुर्गापुर और रानीगंज, जबकि झारखंड में धनबाद, सरायढेला, कतरास, टिकियापाड़ा, महुदा, लोयाबाद और झरिया सहित कई स्थानों पर कार्रवाई की गयी. बताया जा रहा है कि इडी की करीब 25 टीमों ने एक साथ विभिन्न परिसरों में तलाशी ली.
कई कारोबारी जांच के दायरे में
जांच एजेंसी की रडार पर एलबी सिंह, अनिल गोयल, गणेश यादव, रोहित यादव समेत कई कारोबारी बताये जा रहे हैं. जिन लोगों के ठिकानों पर तलाशी की सूचना सामने आयी है, उनमें कोयला कारोबारी पप्पू मंडल, गणेश यादव, माधव सिंह, हरेंद्र चौहान, अनिल गोयल, रोहित यादव, शबीर आलम व एलबी सिंह के करीबी बताये जाने वाले रंजीत सिंह का नाम भी शामिल है. हालांकि, इन सभी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी
दस्तावेज व डिजिटल उपकरणों की जांच
छापेमारी के दौरान इडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद की है. इसके अलावा मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक पासबुक, वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, हिसाब-किताब की डायरी और कोयला कारोबार से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है. जांचकर्ताओं का मानना है कि इनसे कथित अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला और उससे जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है. खबर लिखे जाने तक इडी की कार्रवाई जारी थी और एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था.
2021 से सक्रिय नेटवर्क होने का संदेह
जांच के दौरान इडी को जानकारी मिली थी कि वर्ष 2021 से झारखंड की कई खदानों से कथित रूप से अवैध तरीके से कोयला निकालकर पश्चिम बंगाल में तस्करी की जा रही थी. एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. इडी को संदेह है कि पुलिस तंत्र के कुछ अधिकारी, तत्कालीन सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ नेता और एक प्रभावशाली वकील की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता है. हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, हाल में मिले नये दस्तावेजों और महत्वपूर्ण सूचनाओं के आधार पर मंगलवार की ताजा छापेमारी की गयी. इडी का मानना है कि अब तक सामने आये तथ्यों से कहीं बड़ा नेटवर्क इस मामले के पीछे सक्रिय हो सकता है. उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में भी इसी मामले में ईडी ने व्यापक छापेमारी की थी. उस दौरान एजेंसी ने करीब ढाई करोड़ रुपये नकद और 150 से अधिक जमीनों के दस्तावेज जब्त किये थे. जांचकर्ताओं के अनुसार, उसी कार्रवाई से मिले सुरागों के आधार पर वर्तमान अभियान चलाया गया है.
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