खास बातें
पश्चिम बंगाल समेत 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इलेक्शन कमीशन सिस्टम को री-सेट करने के मोड में आ गया है. फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने और चुनावों की तारीख का ऐलान करने से पहले आयोग ने साफ कर दिया है कि अब कंफर्ट पोस्टिंग नहीं चलेगी. ऐसे अधिकारी, जो लंबे समय से अपने गृह जिले में जमे हुए हैं, उनको अन्य जगहों पर ट्रांसफर करने के निर्देश आयोग ने दे दिये हैं.
बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होंगे चुनाव
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के चीफ सेक्रेटरीज को लेटर लिखकर कहा है कि इलेक्शन मैनेजमेंट से जुड़े अफसरों को न तो उनके होम डिस्ट्रिक्ट में रखा जाये, न ही ऐसी जगह, जहां वे सालों से पोस्टेड हैं.
निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासन का न्यूट्रल रहना जरूरी
इलेक्शन कमीशन ने कहा है कि इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई-जून में खत्म हो रहा है. संविधान के मुताबिक, उससे पहले नयी विधानसभा का गठन जरूरी है. ऐसे में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक सेटअप न्यूट्रल रहना चाहिए.
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सिर्फ इलेक्शन ड्यूटी से जुड़े लोगों की ही ट्रांसफर-पोस्टिंग
कमीशन ने यह भी क्लियर कर दिया है कि उन लोगों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की कोई जरूरत नहीं है, जो सीधे तौर पर इलेक्शन ड्यूटी में नहीं होंगे. मसलन, सरकारी डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर या प्रिंसिपल को इस ट्रांसफर पॉलिसी से बाहर रखा गया है.
आरोपी अफसरों को इस बार नहीं मिलेगी चुनावी ड्यूटी
चुनाव आयोग ने कहा है कि स्टेट हेडक्वार्टर में पोस्टेड अफसरों या सेक्टर ऑफिसर/जोनल मजिस्ट्रेट, जिनको चुनावों के दौरान बड़ी भूमिका निभानी होती है, उन पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी. कमीशन ने यह भी कहा है कि जिन अफसरों पर पहले चुनाव में लापरवाही या गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, या जिन लोगों के खिलाफ डिसिप्लीनरी एक्शन पेंडिंग हैं, उन्हें इस बार चुनाव से जुड़ा कोई काम नहीं दिया जायेगा.
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