Shyama Prasad Mukherjee Chapter in Bengal Syllabus: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र (वर्ष 2027) से भारतीय जनसंघ के संस्थापक और महान शिक्षाविद डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अतुलनीय योगदान से जुड़े अध्यायों को स्कूली और विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम (Syllabus) में शामिल करेगा. यह निर्णय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए गठित विशेष समिति (Special Committee) की पहली उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया.
स्कूल और यूनिवर्सिटी स्तर पर पढ़ाया जायेगा इतिहास
बृहस्पतिवार को बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा- अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर एक अलग विशेष खंड (Dedicated Section) शामिल किया जायेगा. बंगाल और भारत के निर्माण, शिक्षा क्षेत्र के विकास और एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान के बारे में स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के छात्रों को विस्तार से पढ़ाया जायेगा.
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125वीं जयंती पर प्रकाशित होगी विशेष पुस्तक
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि डॉ मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के जश्न के हिस्से के रूप में राज्य सरकार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचारों, राजनीतिक दृष्टिकोण और बंगाल के लिए उनके संघर्षों पर आधारित एक विशेष प्रामाणिक पुस्तक (Book Release) भी प्रकाशित करेगी.
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कलकत्ता विवि के सबसे युवा कुलपति थे डॉ मुखर्जी
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी न केवल देश के प्रमुख राजनेता थे, बल्कि वे महज 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति (Vice-Chancellor) भी बने थे. बंगाल को भारत का हिस्सा बनाये रखने में उनका अतुलनीय योगदान था. कश्मीर में अनुच्छेद 370 का उन्होंने संसद से सड़क तक जोरदार विरोध किया था.
