Darjeeling Tea Production Falls 61 Percent: अपनी अनोखी सुगंध और स्वाद के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध दार्जिलिंग टी (Darjeeling Tea) इंडस्ट्री इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. उत्पादन में आयी ऐतिहासिक गिरावट और बढ़ते आर्थिक संकट के बीच इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) ने पश्चिम बंगाल सरकार से तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता की गुहार लगायी है. आईटीए ने कहा है कि इस विश्व प्रसिद्ध जीआई (GI Tag) धरोहर को बचाने के लिए यह जरूरी है.
14.49 मिलियन किलो से घटकर 5.6 मिलियन किलो हुआ चाय का उत्पादन
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दार्जिलिंग में चाय का उत्पादन वर्ष 1990 में 14.49 मिलियन किलोग्राम था, जो अब घटकर वर्ष 2025 में महज 5.6 मिलियन किलोग्राम रह गया है. यानी सीधे-सीधे उत्पादन में 61 प्रतिशत की गिरावट.
बढ़ती लागत और जलवायु परिवर्तन बनी मुख्य वजह
चाय बागान मालिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि दार्जिलिंग चाय उद्योग पर एक साथ कई आर्थिक और प्राकृतिक संकट आन पड़े हैं. मजदूरों के वेतन, भविष्य निधि (PF) और अन्य भत्तों के कारण उत्पादन लागत काफी बढ़ गयी है. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भी इसके लिए जिम्मेदार है. अनिश्चित मौसम, कम बारिश और तापमान में बदलाव का सीधा असर चाय की पत्तियों की गुणवत्ता और पैदावार पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों से मिल रही कड़ी चुनौती और श्रमिकों की कमी ने संकट को और गहरा कर दिया है.
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दार्जिलिंग के लिए 113 करोड़ और डुआर्स-तराई के लिए 50 करोड़ के पैकेज की मांग
इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) ने राज्य सरकार के सामने एक विशेष वार्षिक सहायता पैकेज (Annual Support Package) का प्रस्ताव रखा है. एसोसिएशन ने कहा है कि दार्जिलिंग टी के लिए 113 करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाये. 50 करोड़ रुपए नियोक्ता (Employers) के पीएफ (PF) अंशदान में राहत देने के लिए देने की मांग की गयी है. उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स चाय (Orthodox Tea) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 28 करोड़ रुपए मांगे हैं.
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चाय कारखानों के आधुनिकीकरण के लिए भी चाहिए पैकेज
परिवहन (Transport), बागानों के मशीनीकरण (Mechanisation) और चाय कारखानों के आधुनिकीकरण (Factory Modernisation) के लिए अलग से पैकेज देने की मांग की गयी है. इसके साथ ही डुआर्स और तराई (Dooars-Terai) के भी लिए राहत देने की अपील की गयी है. पश्चिम बंगाल के कुल चाय उत्पादन का 98 फीसदी हिस्सा कवर करने वाले डुआर्स और तराई क्षेत्रों के चाय बागानों के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की सिफारिश की गयी है.
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