दार्जिलिंग के स्कूलों को राज्यगान से छूट, जीटीए ने दी स्पष्ट अनुमति

दार्जिलिंग हिल्स के स्कूलों में अब प्रार्थना के दौरान राज्यगान गाना अनिवार्य नहीं होगा.

बहुसांस्कृतिक परंपराओं का हवाला जीटीए सचिव ने जारी की नोटिस

कोलकाता. दार्जिलिंग हिल्स के स्कूलों में अब प्रार्थना के दौरान राज्यगान गाना अनिवार्य नहीं होगा. गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) ने शुक्रवार को जारी निर्देश में कहा है कि क्षेत्र के स्कूलों के छात्रों को राज्यगान के गायन से छूट दी गयी है. यह निर्णय पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसइ) की उस अधिसूचना के बाद आया है, जिसमें छह नवंबर को सभी राज्य संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में राष्ट्रगान के साथ-साथ रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित “बांग्लार माटी बांग्लार जोल” को गाना अनिवार्य किया गया था. जीटीए सचिव पीडी प्रधान ने सात नवंबर को जिला स्कूल निरीक्षक को भेजे पत्र में कहा कि हिल क्षेत्र के कई संस्थानों में नेपाली भाषा में पारंपरिक प्रार्थनाएं होती हैं. इसलिए स्थानीय संस्कृति, परंपरा और भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक स्कूल को अपनी नियमित प्रार्थना पद्धति बनाए रखने की अनुमति दी गयी है. डब्ल्यूबीबीएसइ के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि जीटीए क्षेत्र के स्कूलों को इस नियम से छूट दी जायेगी. इस बीच, दार्जिलिंग के भाजपा विधायक नीरज तमांग जिम्बा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कहा कि राज्यगान को अनिवार्य करने वाला आदेश संवैधानिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक चिंताएं उत्पन्न करता है.

उन्होंने कहा, “हमारा संविधान विविधता के माध्यम से एकता का उत्सव मनाता है, न कि आदेश से एकरूपता लागू करने का प्रयास करता है. किसी नागरिक, छात्र या संस्थान को किसी प्रतीक या प्रथा को अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.”

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Published by: Subodh kumar singh

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