बोल्ला काली मंदिर में बलि को लेकर जटिलता खत्म

दक्षिण दिनाजपुर के बोल्ला काली मंदिर में बलि को लेकर जटिलता का कलकत्ता हाइकोर्ट ने समाधान कर दिया.

निषेधाज्ञा से हाइकोर्ट का इनकार

संवाददाता, कोलकाता

दक्षिण दिनाजपुर के बोल्ला काली मंदिर में बलि को लेकर जटिलता का कलकत्ता हाइकोर्ट ने समाधान कर दिया. मामलाकारी के आवेदन पर मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने निषेधाज्ञा लगाने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि बलि को लेकर प्रशासन के साथ बातचीत में जो फैसला लिया गया है, उसे ही महत्व देकर पूजा करनी होगी.

बोल्ला काली मंदिर में पशु बलि पर रोक लगाने को लेकर एक पशु प्रेमी संगठन ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिका में दावा किया गया था कि प्रतिवर्ष रास पूर्णिमा के बाद मंदिर में लगभग 10 हजार बकरियों की बलि दी जाती है. संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत इसे अनिवार्य नहीं माना गया है, इसलिए इस पर रोक लगाने की जरूरत है. मंदिर प्रबंधन का कहना है कि धार्मिक रीति-रिवाज में इसकी अनुमति है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पशु बलि को बंद करने का मामला केवल अदालत के निर्देश पर संभव नहीं है.

उन्होंने कहा कि मंदिर कमेटी व प्रशासन की बैठक में सांकेतिक बलि प्रथा का पालन करने का फैसला लिया गया था, इसका कड़ाई से पालन करना होगा. हालांकि मेला प्रांगण में सीसीटीवी लगाने की अनुमति भी अदालत ने नहीं दी. बलि के लिए निर्धारित जगह पर भीड़ नहीं करने व शांति के साथ संपन्न हो, इसके लिए प्रशासन को कदम उठाने का निर्देश दिया गया.

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