रोबोटिक टेली-सर्जरी से जटिल यूरोलॉजिकल ऑपरेशन सफल

यह प्रक्रिया हाई-स्पीड डेडिकेटेड 5जी इंटरनेट कनेक्शन पर लेटेस्ट एसएसआइ मंत्रा-3 रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के माध्यम से की गयी.

1500 किमी दूर बैठे सर्जनों ने किया ऑपरेशन कोलकाता. फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट, कोलकाता ने रोबोटिक तकनीक की मदद से पूर्वी भारत की पहली टेली-सर्जरी सफलतापूर्वक कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस उपलब्धि के साथ एडवांस्ड रोबोटिक और रिमोट सर्जिकल केयर के क्षेत्र में नयी संभावनाएं खुली हैं. यह प्रक्रिया हाई-स्पीड डेडिकेटेड 5जी इंटरनेट कनेक्शन पर लेटेस्ट एसएसआइ मंत्रा-3 रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के माध्यम से की गयी. इस दौरान ऑपरेशन करने वाले सर्जन लगभग 1,500 किलोमीटर दूर मौजूद थे. कोलकाता और फरीदाबाद में इस तरह की सर्जरी की गयी, जबकि नयी दिल्ली और कोलकाता से डॉक्टरों ने रोबोटिक टेली-सर्जरी के जरिए ऑपरेशन किया. इन प्रक्रियाओं का नेतृत्व डायरेक्टर- यूरोलॉजी और यूरो-ऑन्कोलॉजी डॉ आरके गोपाल कृष्ण तथा फोर्टिस हॉस्पिटल एंड किडनी इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर-यूरोलॉजी डॉ श्रीनिवास नारायण ने किया. इन तीन जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं ने रोबोटिक तकनीक की सटीकता और भारत में टेली-सर्जिकल सिस्टम की क्लिनिकल विश्वसनीयता को प्रदर्शित किया. यह जानकारी गुरुवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी गयी. सम्मेलन में बताया गया कि पहला ऑपरेशन कोलकाता की एक अधेड़ उम्र की महिला पर किया गया, जिसे मुख्य रक्त वाहिकाओं और महत्वपूर्ण अंगों के पास बड़ा एड्रिनल ट्यूमर था. इस ट्यूमर को रिमोट रोबोटिक सर्जरी के जरिए बेहद सटीकता के साथ हटाया गया. दूसरा ऑपरेशन एक युवती पर किया गया, जिसे पेल्विकयूरेटेरिक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन का पता चला था. यह एक जन्मजात समस्या है, जो किडनी के ड्रेनेज को प्रभावित करती है. मेडिकल टीम ने एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रिया पायलोप्लास्टी सफलतापूर्वक की. इन दोनों मामलों में मरीज कोलकाता में थे, जबकि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर दिल्ली में मौजूद थे. मरीज पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और उनकी स्थिति बिगड़ने के कारण इलाज के लिए दिल्ली तक लंबी दूरी तय करना चिकित्सकीय रूप से उचित नहीं था, क्योंकि इससे उनकी हालत और खराब हो सकती थी. तीसरे मामले में फरीदाबाद के 70 वर्षीय व्यक्ति की किडनी में 9 सेंटीमीटर का कैंसरयुक्त ट्यूमर पाया गया. वर्चुअल जांच के बाद उनका टेली-रोबोटिक पार्शियल नेफ्रेक्टोमी किया गया. इस प्रक्रिया में किडनी को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को हटा दिया गया. स्थायी नुकसान से बचाने के लिए 30 मिनट की सख्त क्लैंप विंडो के भीतर सर्जिकल टीम ने केवल 22 मिनट में ट्यूमर हटाने और रिकंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया पूरी कर ली. मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं पड़ी और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है. अगले दो-तीन दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है. तीनों सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुईं और ऑपरेशन के बाद मरीजों की रिकवरी भी सहज रही. डॉ आरके गोपाल कृष्ण ने बताया कि टेली-सर्जरी सर्जनों को रोबोट-आधारित सिस्टम, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और रियल-टाइम 3डी इमेजिंग की मदद से दूर बैठकर ऑपरेशन करने की सुविधा देती है. इससे भौगोलिक दूरी की बाधाएं दूर होती हैं और मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है.

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Author: GANESH MAHTO

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