मुख्य चुनाव अधिकारी के खिलाफ बागनान थाने में शिकायत हुई दर्ज

आरोप है कि हावड़ा के आमता निवासी शेख जमात अली (64) नाम के एक बुजुर्ग की सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद रविवार रात हार्ट अटैक से मौत हो गयी.

बुधवार को बुजुर्ग व्यक्ति को सुनवाई के लिए बुलाया गया था कोलकाता. एसआइआर प्रक्रिया की सुनवाई के दौरान बहुत ज्यादा परेशान करने का आरोप लगा गया है. आरोप है कि हावड़ा के आमता निवासी शेख जमात अली (64) नाम के एक बुजुर्ग की सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद रविवार रात हार्ट अटैक से मौत हो गयी. मृतक के परिजनों का आरोप है कि सुनवाई के कारण वह मानसिक तनाव से बीमार पड़े और अंत: उनकी मौत हो गयी. मृतक के बेटे शेख कमाल हुसैन ने इस मौत के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार, राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर ( सीईओ ) मनोज अग्रवाल और इलेक्शन कमीशन के दूसरे अधिकारियों के खिलाफ हावड़ा के बागनान पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराया है. मृतक के बेटे शेख कमाल हुसैन का दावा है कि उनके पिता इस देश के नागरिक हैं. एक सीनियर सिटिजन यह नोटिस मिलने के बाद, वे बहुत डरे हुए और मानसिक रूप से परेशान थे. उन्हें चिंता थी कि कहीं उनकी नागरिकता और वोटिंग का अधिकार छीन ना लिया जाये. मृतक सीनियर सिटिजन के बेटे ने आरोप लगाया कि अधिकारी बेपरवाह थे और नोटिस मिलने और अधिकारियों से सीधी मदद न मिलने के बाद उनके पिता टूट गये थे. नतीजतन, हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गयी. चार्जशीट के मुताबिक, मृतक सीनियर सिटिजन को 31 दिसंबर को सुनवाई के लिए बुलाया गया था. वजह यह बताई गयी कि उनके पिता का नाम पिछली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं था, लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि गिनती का फॉर्म जमा करते समय उनके पिता द्वारा दी गयी जानकारी पर कोई आपत्ति नहीं जतायी गयी थी. शिकायत इंडियन पीनल कोड की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 106 (लापरवाही से मौत) और दो अन्य धाराओं के तहत दर्ज की गयी है. ध्यान देने वाली बात यह है कि उसी दिन पुरुलिया के पारा थाना इलाके में भी एक व्यक्ति ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करायी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एसआइआर प्रोसेस में सुनवाई के दौरान प्रताड़ना के कारण प्रवीण ने आत्महत्या कर ली. इस पर मंगलवार को सीईओ ऑफिस ने दावा किया कि कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है. यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. हालांकि, पार्लियामेंट्री कानून के मुताबिक, इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं की जा सकती. यह बात सेक्शन 16 में बतायी गयी है. अगर इसके बाद भी पुलिस एफआइआर दर्ज करती है, तो यह कानून के खिलाफ है.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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