चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने ग्रुप बी श्रेणी के तहत कार्यरत 8,505 अधिकारियों की सूची माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्ति के लिए आयोग को सौंपी थी.
चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने ग्रुप बी श्रेणी के तहत कार्यरत 8,505 अधिकारियों की सूची माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्ति के लिए आयोग को सौंपी थी. अब इस सूची को लेकर नये सवाल खड़े हो गये हैं. आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा भेजी गयी सूची में लगभग 30 प्रतिशत कर्मचारी ग्रुप सी श्रेणी के हैं, जबकि उन्हें ग्रुप बी अधिकारी के रूप में दर्शाया गया है. इस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जतायी है और इसे गंभीर त्रुटि माना है.इसके अलावा आयोग ने यह भी बताया है कि सूची में शामिल 440 अधिकारी पहले से एइआरओ यानी सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. आयोग ने सवाल उठाया है कि जो अधिकारी पहले से एइआरओ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में कैसे नियुक्त किया जा सकता है. इस पूरे मामले पर सीइओ कार्यालय ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है. अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण देती है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है.
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