कलकत्ता यूनिवर्सिटी को नहीं मिल रहे छात्र, कई कॉलेजों में घटेंगी बीए-बीएससी की सीटें

Calcutta University: कम एनरोलमेंट के चलते सिंडिकेट ने सीट रैशनलाइजेशन पर फैसला लिया है. इस फैसले के पीछे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि एनआइआरएफ रैंकिंग सुधारने के लिए खाली सीटें कम करना जरूरी था.

Calcutta University: कोलकाता. कलकत्ता यूनिवर्सिटी (सीयू) से संबद्ध कॉलेजों में स्नातक (यूजी) स्तर पर कम मांग वाले विषयों की सीटें घटाने का बड़ा निर्णय लिया गया है. यूनिवर्सिटी सिंडिकेट की मंजूरी के बाद यह कदम पिछले कुछ वर्षों से बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने और छात्र इनटेक ट्रेंड्स के रिव्यू के आधार पर उठाया गया है. सीयू के रजिस्ट्रार देबाशीष दास ने स्पष्ट किया कि कॉलेजों को डिमांड का वास्तविक विश्लेषण करने के लिए कहा गया है ताकि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके. सीटें खाली रहने से एनआइआरएफ में भी कॉलेज के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ता है.

कई संस्थानों में घटायी गयीं सीटें

सीटों के असेसमेंट के बाद कई प्रमुख कॉलेजों ने अपने यहां सीटें कम करने के प्रस्ताव दिये हैं:

  • न्यू अलीपुर कॉलेज: प्रिंसिपल जॉयदीप सारंगी के अनुसार, कम एनरोलमेंट के कारण मैथ्स, इकोनॉमिक्स, बंगाली और संस्कृत जैसे विषयों में कुल 225 अंडरग्रेजुएट सीटें कम करने की मांग की गयी थी, क्योंकि इन सीटों के लिए छात्र ही उपलब्ध नहीं हैं.
  • स्कॉटिश चर्च कॉलेज: यहां बंगाली, फिलॉसफी, संस्कृत और मल्टीडिसिप्लिनरी प्रोग्राम (पुराना पास कोर्स) में सीटें कम की गयीं हैं. संस्थान ने मल्टीडिसिप्लिनरी प्रोग्राम में एडमिशन क्षमता को 100 से घटाकर 50 कर दिया है.
  • लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज: प्रिंसिपल सिउली सरकार ने बताया कि ””सीट रैशनलाइजेशन”” (सीटों के युक्तिकरण) पर चर्चा के लिए जल्द ही विभागाध्यक्षों (एचओडी) के साथ बैठक की जायेगी.

डिमांड बढ़ने पर बीबीए की सीटें हुईं दोगुनी

एक तरफ जहां ट्रेडिशनल आर्ट्स और साइंस विषयों की सीटें घटायी जा रहीं हैं, वहीं दूसरी ओर जॉब-ओरिएंटेड कोर्सेज की मांग तेजी से बढ़ी है. स्कॉटिश चर्च कॉलेज के एक अधिकारी ने बताया कि छात्रों के बढ़ते रुझान और मांग को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) कोर्स में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 100 कर दी है. यूनिवर्सिटी के अनुसार, कई अन्य कॉलेजों ने भी बीबीए जैसी व्यावसायिक सीटों को बढ़ाने के प्रस्ताव भेजे हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है.

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Published by: Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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