तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपए फ्रीज किये जाने के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से ममता बनर्जी गुट को अंतरिम राहत मिल गयी है. हाईकोर्ट ने पार्टी को अपने नियमित दैनिक परिचालन, प्रशासनिक कार्यों और अदालती मुकदमों के कानूनी खर्चों के लिए बैंक खातों से धनराशि का उपयोग करने की सशर्त अनुमति दे दी है.
ममता की पार्टी को पूर्ण नियंत्रण नहीं
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि ममता बनर्जी की पार्टी को खातों का सीधा और पूर्ण नियंत्रण नहीं सौंपा जा रहा है. कोर्ट ने वित्तीय पारदर्शिता बनाये रखने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर (Special Officer) नियुक्त किया है, जो 30 सितंबर 2026 तक इन खातों के संचालन और फंड निकासी की निगरानी करेंगे.
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान उठाये पुलिस पर सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर बैंक खातों पर लगायी गयी पाबंदी और जल्दबाजी पर सवाल खड़े किये. पीठ ने टिप्पणी की कि अंतरिम चरण में खाते तुरंत फ्रीज करने का कोई ठोस या पर्याप्त आधार नजर नहीं आ रहा. कोर्ट ने कहा कि जब सामान्य नागरिक थाने पहुंचते हैं, तो कार्रवाई धीमी होती है, लेकिन इस मामले में आश्चर्यजनक गति से खातों को फ्रीज कर दिया गया.
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खातों के संचालन के लिए जारी 3 दिशा-निर्देश?
तृममूल कांग्रेस के 3 बैंक अकाउंट्स के संचालन के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं, जो इस प्रकार है.
- स्पेशल ऑफिसर की मंजूरी : पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बैंक चेक प्रस्तुत करेंगे, जिसे स्पेशल ऑफिसर की प्रतिहस्ताक्षर (Countersign) के बाद ही बैंक द्वारा प्रोसेस किया जायेगा.
- सीमित खर्च की अनुमति : बैंक खातों से केवल दैनिक संगठनात्मक खर्चों, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी लड़ाई से जुड़े बिलों का ही भुगतान हो सकेगा.
- बड़े लेन-देन पर रोक : किसी भी बड़े, असामान्य या पूंजीगत खर्च पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी.
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राजनीतिक गुटबाजी पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब विरोधी पक्ष ने तृणमूल कांग्रेस के वास्तविक नेतृत्व और गुटबाजी का मुद्दा उठाया, तो हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि यह व्यवस्था केवल अंतरिम राहत के रूप में दी गयी है. इस आदेश से पार्टी के किसी भी गुट के असली होने का दावा या अधिकार तय नहीं होता है. यह विषय निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष लंबित है और भविष्य में चुनाव आयोग के फैसले के आधार पर कोर्ट के इस अंतरिम आदेश में संशोधन किया जा सकता है. इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 तय की गयी है.
