कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता व सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज चार प्राथमिकियों (FIRs) को रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की अर्जी खारिज कर दी.
अदालत में लिस्ट के आधार पर ही होगी सुनवाई
रॉय की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अदालत में सूचीबद्ध मामलों के लिस्ट (Serial Number) के अनुसार ही होगी. अदालत ने टिप्पणी की कि इसी तरह के कई अन्य मामले भी सूची में पहले से पेंडिंग हैं. इसलिए रॉय की याचिका को प्राथमिकता देकर ऊपर लगाने की कोई गुंजाइश नहीं है.
वकील ने दी 4 अलग-अलग मामलों की जानकारी
सुमित रॉय के वकील त्रिदीप पाइस ने अदालत में तर्क दिया कि जिन 4 प्राथमिकियों को रद्द करने की मांग की जा रही है, वे उन 2 अन्य मामलों से पूरी तरह अलग हैं, जिनमें उनके मुवक्किल को पहले से राहत मिली हुई है. वकील ने 10 अगस्त को मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, ताकि पुलिस की किसी भी संभावित दंडात्मक कार्रवाई से रॉय को अंतरिम संरक्षण मिल सके.
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जमीन कब्जा मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
इससे पहले बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबनी में सरकारी जमीन कब्जाने से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जारी जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था.
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कैश फॉर जॉब स्कैम में हाईकोर्ट ने दी थी अग्रिम जमानत
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने सालबनी मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके खिलाफ वे शीर्ष अदालत पहुंचे थे. नौकरी के बदले नकद (Cash-for-Job) घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में सुमित रॉय को हाईकोर्ट से पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है.
